शिवराज के चौतरफा विकास की तस्वीर, बदहाल गाँव, सड़क है नहीं, मुर्दे की तरह ले जाते हैं मरीज़ को

By: jhansitimes.com
Jul 30 2018 10:10 am
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छतरपुर: एक तरफ मंचों और मन की बात से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार और बीजेपी की तमाम सरकारें डिजिटल इंडिया, न्यू इंडिया , सबका साथ सबका विकास और साफ़ नीयत, सही विकास की बात कर रही हैं, देश में स्मार्ट सिटी बनाए जा रहे हैं वहीँ आज भी देश में ऐसे गांव है,जहां के लोग नर्क जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं. कोई भी सड़क ना होने से यहां के हालात यह हैं कि अगर यहां कोई बीमार हो जाए तो उसे चारपाई में रखकर चार कांधों पर ऐसे ले जाया जाता है जैसे किसी मुर्दे को श्मशान ले जाते हैं.

यह चौंकाने वाली कहानी है छतरपुर जिले के जरेला गांव की.छतरपुर मध्य प्रदेश का एक महत्वपूर्ण जिला है . मध्य प्रदेश में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. प्रदेश में बीजेपी की सरकार है जिसके मुखिया शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के तौर पर तीन पारियां खेल चुके हैं और  चौथी बार जीत के सपने देख रहे हैं क्योंकि उनके दावे हैं कि उन्होंने प्रदेश में चौतरफा विकास कराया है. 

जिला मुख्यालय से 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लगभग 900 की आबादी वाले गौरिहार ब्लॉक की किशुनपुर पंचायत का एक ऐसा गांव जिसे विकास के दौर की किताब का छूटा हुआ पन्ना कहा जाए तो अतिशयोक्ति ना होगी. इस गांव के हालात ऐसे हैं कि यहां के लोग बद से बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं. आजादी के सात दशक के बाद भी यहां आज तक कोई सड़क नहीं पहुंची और जिसकी वजह से बारिश में जैसे यहां की जिंदगी थम सी जाती है.

जहाँ इस गांव में सड़क के नाम पर सिर्फ  गलियां है वही इस गांव के बच्चों का भविष्य भी चौपट है, स्कूल के नाम पर शासकीय प्राथमिक शाला है और वह भी क्षतिग्रस्त है बिल्डिंग में बड़ी बड़ी दरारे आ गयी हैं , न सिर्फ बच्चे ग्रामीण बल्कि शिक्षक भी दहशत में रहते है,और इस वजह से विद्यालय गांव में एक पेड़ के नीचे लगता है.  शिक्षक राम सिंह पटेल बताते हैं चूंकि बिल्डिंग क्षतिग्रस्त है इसलिए अधिकारियों को सूचना के बाद हम पेड़ के नीचे बच्चों को पढ़ाते हैं. स्कूल का रास्ता भी कीचड़ भर है जिससे बरसात में स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है ,

गांव में कोई भी माध्यमिक विद्यालय भी नही है जिसकी वजह से छात्र 2 किलोमीटर दूर निभिया पुरवा गांव के माध्यमिक विद्यालय जाते है. बारिश शुरू तो मिडिल लेबल की पढ़ाई ठप्प हो जाती है क्योंकि छात्र  गांव में ही कैद हो जाते हैं

गांव के बाहर किसी भी तरफ जाने के लिए यहां घुटनों से ऊपर कीचड़ से निकलना पड़ता है बारिश के मौसम में यहां की गलियों में कीचड़ ही कीचड़ हो जाता है और यहां के लोग घर से बाहर निकलने के लिए तरस जाते हैं और इन हालातों में बच्चों की पढ़ाई भी पूरी तरह से ठप हो जाती है क्योंकि वह कीचड़ की वजह से स्कूल तक नहीं पहुंच पाते.बारिश का पानी कच्ची गलियों में जब  भर जाता है तो  कोई और वाहन तो दूर  जहां ट्रैक्टर और बैलगाड़ियां निकलने भी मुश्किल हो जाती हैं.

सरकारी विकास के दावों की पोल खोलती हैं इस गांव की तस्वीरें.  यहां के लोग अपनी कहानी को बयां करते हुए यह कहते हैं कि यहां तो कोई नेता या अधिकारी कभी हमारी सुध तक लेने नहीं आता. चुनावी समय में नेता वोट मांगने जरूर आते हैं लेकिन उसके बाद पलट कर इस ओर कभी नहीं देखते बारिश के दौर पर यहां लोग ना तो बाजार जा पाते हैं और ना ही उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों का कोई सामान ही मिल पाता है वही इस गांव में प्रसूता महिलाओं को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है क्योंकि इस गांव तक ना तो कभी जननी एक्सप्रेस पहुंच पाई और ना ही 108 की सुविधा इस गांव वालों को मिल पाती.

यहां के मरीज जब बीमार हो जाते हैं तो उन्हें चारपाई में रखकर चार कंधों पर एक से डेढ़ किलो मीटर तक ले जाया जाता है ,कोई भी रोजगार का साधन ना होने और बारिश में यहां की जिंदगी का के अंदर कैद हो जाने की वजह से गांव के लगभग 30% लोग पलायन कर चुके हैं और जो बचे हैं वो अपने आप को गुलामों जैसी जिंदगी जीना बताते हैं,

जब इस संबंध में हमने क्षेत्रीय बीजेपी के विधायक आर डी प्रजापति से गांव की दुर्दशा के संबंध में बात की तो उन्होंने वहां के  हालात की जानकारी होना बताते हुए पहले तो अपनी उपलब्धियों का बखान किया और बाद में जल्दी वहां सड़क मुहैया कराने की बात कही ,

जिलाधिकारी रमेश भंडारी भी इस गांव में प्रक्रिया के बाद जल्द सड़क निर्माण की बात कर रहे हैं.अब देखना यह है विकास के दावों  से कोसों दूर इस गांव के हालात कब सुधरेंगे ,कब इस गांव के लोग मुख्यधारा से जुड़ पाएंगे और कब इस गांव में सरकारी सिस्टम के विकास की गाड़ी पहुंचेगी या फिर इन ग्रामीणों को अभी और बनवास झेलना होगा. 


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