बहिन जी! बुंदेलखंड में धीरे-धीरे रसातल में जा रही बसपा, पार्षद तक नहीं जिता पाए पदाधिकारी

By: jhansitimes.com
Dec 05 2017 07:16 pm
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झांसी। बुन्देलखंड में मजबूत माने जाने वाली बहुजन समाज पार्टी को सन 2009 में लोकसभा, फिर 2012 में विधानसभा, फिर 2014 में लोकसभा और हाल ही में सम्पन्न 2017 विधानसभा चुनाव के बाद अब स्थानीय निकाय चुनाव में भी बसपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी को एक के बाद एक हार क्यों मिल रही है इसका कारण क्या बुन्देलखंड का कमजोर संगठन है या फिर वर्तमान में पार्टी की बागडोर संभालने वाले कार्डिनेटर नौशाद अली सहित अन्य महत्वपूर्ण पदाधिकारी।  

मालूम हो कि अभी हाल ही में स्थानीय निकाय चुनाव हुए है। जिसमें झांसी महापौर समेत बुन्देलखंड के सातों जनपदों में बहुजन समाज पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। यदि हम झांसी, ललितपुर और चित्रकूट जनपद की बात करें तो यहां पार्टी का सूपड़ा ही साफ हो गया है। ललितपुर नगर पालिका से तो पार्टी एक पार्षद भी नहीं जिता सकी है। जबकि इस जनपद के दोनों विधानसभाओं से विधायक चुने जाते थे। 

बताते चले कि बुन्देलखंड में पार्टी की हार और गिरते स्तर का सिलसिला वर्ष 2008 से धीरे-धीरे चला आ रहा है। इसका कारण कहीं न कहीं वर्तमान में बुन्देलखंड का कमजोर संगठन है। जिसमें पार्टी की बुन्देलखंड में बागडोर संभाल रहे कार्डिनेटर नौशाद अली सहित कई महत्वपूर्ण पदाधिकारी हैं। चर्चा है कि चुनाव से पहले इन महत्वपूर्ण पदाधिकारियों ने सर्वप्रथम मिशनरी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की। इसके बाद मेहनती कार्यकर्ताओं को नजर अंदाज कर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा और फिर सातों जनपदों में जी हजूरी करने वाला कमजोर संगठन बनाया। 

इसके बाद चुनाव में अधिकांश प्रत्याशियों को टिकट थमाया जिनसे जनता कभी नाराज रही है और उनका कभी भी जनाधार नहीं रहा है। जिस कारण पार्टी को 2008 से एक के बाद एक करारी हार मिल रही है। हालांकि सन 2007 के विधानसभा चुनाव में 21 सीटों में से 13 सीटों पर जीत हासिल की थी और उस समय बुन्देलखंड की बागडोर संभालते थे बृजलाल खाबरी, दद्दू प्रसाद, तिलक चन्द्र अहिरवार, मुकेश अहिरवार, गयाचरन दिनकर जैसे दिग्गज |  लेकिन अब बागडोर है दिग्गज नेता नौशाद अली के हाथ में, और परिणाम आपके सामने पार्टी का सूपड़ा साफ़। 

इसलिए मिलती है बुन्देलखंड में बसपा को चुनाव में हार

बुन्देलखंड में बसपा को मिलने वाली हार सबसे बड़ा कारण है चुनावी मैदान में कमजोर प्रत्याशियों का उतारना और बदलना।

 -सर्वप्रथम हम बात करते हैं स्थानीय निकाय चुनाव की। जिसमें पार्टी मुखिया ने 2017 में मिली करारी हार के बाद यह ऐलान किया था कि पार्टी किसी भी उम्मीदवार से पैसे लेकर टिकट नहीं देगी। लेकिन इस चुनाव में पार्टी के वर्तमान पदाधिकारियों ने जमकर महापौर और नगर पालिका अध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष व पार्षदों तक से मोटी रकम लेकर टिकट थमाया और अपने जीतने व पार्टी के लिए बूथ पर काम करने वाले पदाधिकारियों की उपेक्षा की गई।

-स्थानीय निकाय चुनाव घोषित होने के पहले पार्टी पदाधिकारी अपने जमीनी कार्यकर्ता को टिकट देने का आश्वासन देते हैं और चुनाव की तिथि घोषित होते ही वह भाजपा सहित अन्य दलों से मिलकर आयतित उम्मीदवारों को टिकट थमा देते है। जिस कारण टिकट कटने वाले प्रत्याशी पार्टी पर मोटी रकम मांगने का आरोप लगाकर प्रचार करते है। जिसका परिणाम बुन्देलखंड में पार्टी का सूपड़ा साफ है। 

-निकाय चुनाव में पार्टी का कारण कमजोर संगठन और लापरवाह पदाधिकारी है। जिन्होंने अपने स्वार्थ को देखते हुए संगठन में ऐसे लोगों को जोड़ा है जिनका जनता के बीच किसी भी प्रकार कोई सम्बंध नहीं है। वह कभी भी पार्टी के कार्यकर्ताओं की समस्या को लेकर मदद नहीं करते हैं। यदि झांसी जनपद के संगठन की बात करें तो संगठन के एक बड़े पदाधिकारी से मिशनरी कार्यकर्ता नाराज हैं। जिसके बारे में कार्यकर्ताओं द्वारा कई बार कार्डिनेटरों को अवगत कराया जा चुका है। इसके बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। आलम यह है कि पार्टी के महानगर अध्यक्ष आनंद साहू की पत्नी को स्थानीय निकाय चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा और पार्टी के मंडल जोन कार्डिनेटर रवि कांत मोर्या की मां को मात्र 13 वोट से जीत मिली है। आप समझ सकते है कि संगठन कितना दमदार है। 


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