सपना, जो सत्ताधारी यहां की जनता को बीते तीन दशकों से दिखा रहे

By: jhansitimes.com
Jul 02 2019 06:13 pm
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जनश्रुति के अनुसार संवत 1636 के आसपास भादों की अंधेरी रात में यमुना नदी के माध्यम से गोस्वामी तुलसीदास कंजौसा घाट पहुंचे थे और उन्होंने मध्यधार से ही पानी पिलाने की आवाज लगाई थी, जिसे सुनकर बाबा मुकुंदवन ने कमंडल में पानी लेकर यमुना की तेज धार पर चल कर गोस्वामी तुलसीदास को पानी पिलाकर तृप्त किया था। बाद में रामभक्त महाकवि उनके आश्रम पर रुके और जगम्मनपुर किले के मैदान में उन्होंने भगवान राम की कथा सुनाई थी। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि बाबा की अलौकिक शक्तियां उनकी रक्षा करती हैं जिसका प्रमाण है कि यहां पर कभी भी उपलवृष्टि नहीं हुई है। इसी के निकट काली मंदिर है जिसमें बाबा के चरण बने हुए हैं जिन पर पान या पांच बतासे रखकर श्रद्धालु माथा टेकते हैं। इस स्थल को विकसित करने की भी योजनायें भी बनाई गई लेकिन खूखांर डाकूओं के आंतक के चलते कोई भी विकास योजना सतह पर प्रभावी नहीं हो सकी।

पंचनद बांध बीहड़ के सपनों में शामिल है। सपना जो सत्ताधारी यहां की जनता को बीते तीन दशकों के दिखा रहे हैं। पंचनद मध्यप्रदेश के भिंड और उत्तर प्रदेश के इटावा, जालौन, औरैया जिले की सीमा पर यमुना और उसकी सहायक नदियों चंबल, क्वारी, पहुंच और सिंध का मिलन स्थल है। इस जगह पर ही वह प्रसिद्ध मंदिर है जिसके बारे में कहा जाता है कि तुलसीदास ने यहां प्रवास किया हो। आज तो यह स्थल बीहड़ में अपराध और गरीबी के बीच सांसे ले रही जनता और उपजाऊ होने के बाद भी बेकार पड़ी बीहड़ की जमीन को एक नई जिंदगी दे सकता है। इस बांध पर सबसे पहली योजना 1986 में बनी थी। यहां बांध बनाने की बात इंदिरा गांधी ने कही थी। पंचनद बांध योजना के तहत उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद में यमुना नदी पर औरैया घाट से 16 किमी अपस्ट्रीम में सढरापुर गांव में बैराज का निर्माण प्रस्तावित है। इस स्थल के अपस्ट्रीम में चंबल, क्वारी, सिंध और पहुज नदियां मिलती हैं।


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