खुलकर बातचीत करें, यौन रोगों से बचें

By: jhansitimes.com
Mar 28 2018 04:51 pm
171

Report - pradip srivastav, नई दिल्ली। अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के डाॅक्टर का मानना है कि यौन रोगों का खतरा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, कारण कि पूरी तरह से ठीक वाली बीमारी भी बातचीत नहीं करने के कारण गुपचुप तौर पर फैलती जा रही है। एक समय यह बीमारी एचआईवी में बदल जाती है, जिससे बचना मुश्किल जो जाता है।

आधुनिक जीवन शैली के कारण समाज में यौन संचारित बीमारियों (एसटीडी) का खतरा बढ़ता जा रहा है। यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को अंतरंग संबंधों के दौरान फैलती जाती है, और यह पता भी चल नहीं पाता है कि कब इसने भयानक रूप धारण कर लिया। यह एक आम समस्या बनती जा रही है। मेडिकल साइंस के एक्सपर्ट का मानना है कि हर साल 20 लाख नए रोगी इससे संक्रमित होते हैं, जो दूसरे बीमारी से ज्यादा खतरनाक है। कुछ एसटीडी जैसे सिफलिस, गोनोरिया, क्लैमाडिया आदि मुख्य रूप से यौन संपर्क से फैलते हैं। एसटीडी होने से रोगी को सबसे ज्यादा खतरा एचआईवी का होता है, जिससे बचना मुश्किल होता है।

अमेरिका जैसे खुले समाज में एसटीडी काफी खतरनाक है। इसलिए, मिशिशिया में बीयूमोंट मेडिकल सेंटर के डॉक्टर सुमित फोगला एसटीडी पर जागरूकता फैला रहे हैं। उन्होंने एक वेबसाइट www.intimatediaries.com तैयार किया है, जिसमें एसटीडी के कारण, लक्षण व इसके रोकथाम के जरूरी बातों को डिजिटल फार्म में लोड किया है। इसके साथ ही उन्होंने इसी नाम से एक एंड्राएड एप भी तैयार किया है, जो लोगों को जागरूक करने में मदद कर रहा है। कई सालों के रिसर्च और ओपीडी में सूक्ष्य अवलोकन के बाद डाॅक्टर फोगला का कहना है कि एसटीडी से अधिकतर युवा व किशोर वर्ग ही प्रभावित होता है। सबसे जरूरी है कि सेक्स के दौरान सावधानी बरती जाए, इसके लिए कंडोम सबसे बेहतर उपाय है। ह्यूमन पपिलोमावायरस (एचपीवी) को रोकने के लिए टीके भी उपलब्ध हैं।

डॉक्टर फोगला का कहना है कि अगर किशोरों व युवाओं को यौन शिक्षा के साथ ही एसटीडी के बारे में शिक्षित किया जाए इससे प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता हैं। हमारे समाज में सबसे बड़ी कमी है कि आपस में बातचीत नहीं करते हैं, जिससे यह बीमारी एक से दूसरे में गुपचुप तरीके से फैलती जाती है। हमें अपने परिजनों खासतौर पर माता - पिता से स्वस्थ्य संबंध बना कर रखना चाहिए, जिससे आसानी से बातचीत कर सके। एचआईवी, एसटीडी और गर्भावस्था रोकने के तरीकों के बारें में साइंटिफिक व तथ्यात्मक जानकारी लेनी चाहिए। इस बीमारी से ज्यादा से ज्यादा जागरूकता ला कर ही बचा जा सकता है।


comments

Create Account



Log In Your Account



छोटी सी बात “झाँसी टाइम्स ” के बारे में!

झाँसी टाइम्स हिंदी में कार्यरत एक विश्व स्तरीय न्यूज़ पोर्टल है। इसे पढ़ने के लिए आप http://www.jhansitimes .com पर लॉग इन कर सकते हैं। यह पोर्टल दिसम्बर 2014 से वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई की नगरी झाँसी (उत्तर प्रदेश )आरंभ किया गया है । हम अपने पाठकों के सहयोग और प्रेम के बलबूते “ख़बर हर कीमत पर पूरी सच्चाई और निडरता के साथ” यही हमारी नीति, ध्येय और उद्देश्य है। अपने सहयोगियों की मदद से जनहित के अनेक साहसिक खुलासे ‘झाँसी टाइम्स ’ करेगा । बिना किसी भेदभाव और दुराग्रह से मुक्त होकर पोर्टल ने पाठकों में अपनी एक अलग विश्वसनीयता कायम की है।

झाँसी टाइम्स में ख़बर का अर्थ किसी तरह की सनसनी फैलाना नहीं है। हम ख़बर को ‘गति’ से पाठकों तक पहुंचाना तो चाहते हैं पर केवल ‘कवरेज’ तक सीमित नहीं रहना चाहते। यही कारण है कि पाठकों को झाँसी टाइम्स की खबरों में पड़ताल के बाद सामने आया सत्य पढ़ने को मिलता है। हम जानते हैं कि ख़बर का सीधा असर व्यक्ति और समाज पर होता है। अतः हमारी ख़बर फिर चाहे वह स्थानीय महत्व की हो या राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय महत्व की, प्रामाणिकता और विश्लेषण के बाद ही ऑनलाइन प्रकाशित होती है।

अपनी विशेषताओं और विश्वसनीयताओं की वजह से ‘झाँसी टाइम्स ’ लोगों के बीच एक अलग पहचान बना चुका है। आप सबके सहयोग से आगे इसमें इसी तरह वृद्धि होती रहेगी, इसका पूरा विश्वास भी है। ‘झाँसी टाइम्स ‘ के पास समर्पित और अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ संवाददाताओं, समालोचकों एवं सलाहकारों का एक समूह उपलब्ध है। विनोद कुमार गौतम , झाँसी टाइम्स , के प्रबंध संपादक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। जो पूरी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता का पिछले लगभग 16 वर्षों का अनुभव है। के पी सिंह, झाँसी टाइम्स के प्रधान संपादक हैं।

विश्वास है कि वरिष्ठ सलाहकारों और युवा संवाददाताओं के सहयोग से ‘झाँसी टाइम्स ‘ जो एक हिंदी वायर न्यूज़ सर्विस है वेब मीडिया के साथ-साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना विशिष्ट स्थान बनाने में कामयाब रहेगा।