सजाया जा रहा है दुल्हन की तरह शहर, यह है बड़ा कारण

By: jhansitimes.com
Aug 13 2019 04:52 pm
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(रिपोर्ट-सैय्यद तामीर उद्दीन) महोबा । एतिहासिक कजली मेला शुक्रवार से शुरू हो रहा है, कजली मेले की सारी तैयारिया मुकम्मल हो चुकी है, शहर को आकर्षक तोरण द्वार से दुल्हन की तरह सजाया जा रहा  है, मेला स्थल पर दुकाने सज, धज कर तैयार हो रही है, कजली मेला देखने के लिये रिश्तेदारियों में मेहमान पहंुच चुके है मेजबान उनका पलक, पावंड़ा बिछा कर स्वागत कर रहे है, प्राचीन परम्परा के अनुसार कजली मेला यहां तीन दिनों तक आयोजित किया जाता है, हालांकि बीते यहां कोई ढाई दशक से मेले का स्वरूप बदला है और अब वह सप्ताह भर तक चलता है, लेकिन पुरानी परम्परा का निर्वाह करते हुये मेेहमान तीन दिनों तक रिश्तेदारियों में रहकर कजली मेला देखते है। 
शहर को सजाया जा रहा है,  जगह, जगह तोरण द्वार बनाये जा रहे है, बाजार में कजली मेले की चहल, पहल जोरो पर है, मेहमानों के स्वागत में मेजबानों की उनके आवभगत की तैयारियों में लग गये है। शाक, सब्जी खरीददारियां की जा रही है। मेला देखने के लिये आने वाले मेहमानों का आगमन अपनी रिश्तेदारियों में आना शुरू हो चुका है। 
16 अगस्त से एतिहासिक कजली मेले की शुरूआत हो रही है, जिला विकास संरक्षण समिति द्वारा जहां मेले में सात दिवसीय कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा, वहीं आल्हा परिषद द्वारा सप्ताह भर आल्हा मंच में कार्यक्रमों में का आयोजन होगा, मेला शुरू होने के बाद से आल्हा मंच में सात दिनों तक अनवरत कार्यक्रमों की गंूज रहती है, आल्हा मंच और सांस्कृतिक मंच को अंतिम रूप दे दिया है, पिछले कुछ दिनांे से कारीगर लगातार उसे सजाने, संवारने का काम कर रहे थे। कीरत सागर तटबंध चहल पहल, दिखाई पड़ने लगी है लगभग चार सैकड़ा दुकाने मेला स्थल पर सज, धज कर तैयार हो चुकी है, अभी से लोग वहां पहुंचकर खरीददारियां करने लगे है।  
 यहां बाहर से आये और स्थानीय दुकानदारों के बीच मेला स्थल में भूमि का आवंटन हो जाने के बाद से वे उसे तैयार करने में जुट हुये थे, बांस, बल्ली और तिरपाल, बरसाती, के माध्यम से दुकानें तैयार किया गया है। बारिश को मददेनजर रखते हुये उसे उसी अनुरूप बनाया जा रहा है, यहां दिन रात मंच से लेकर दुकानों को तैयार किये जाने काम गति पकड़े हुये  है। 
नगर प्रशासन द्वारा कीरत सागर तटबंध पर मौरंग, डस्ट, बिछाकर सड़क का निर्माण कराया गया है।, बिजली, पानी आदि की व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया गया है। बिजली की झालरें, टयूब लाइट लगाकर रोशनी के प्रबंध किये गये है, इधर शहर में मेले को लेकर सजावट का काम पूरा हो चुका है। जगह, जगह नगर में तोरण द्वार बनाये गये है, उधर कजली मेले को देखने के लिये बाहर से मेहमानों का आना रिश्तेदारियों में शुरू हो गया है, और मेजबान भी उनका पलक पांवड़े बिछाकर स्वागत कर रहे है। कजली मेले में बाहर से तमाम लोग अपनी रिश्तेदारियों में आकर कम से कम तीन दिन रह कर मेलेे का आनंद उठाते है। 


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