बेटी दर्द से चीखती-चिल्लाती रही- पापा आज छोड़ दो लेकिन नहीं माना हैवान और....

By: jhansitimes.com
Nov 09 2017 08:00 pm
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बिगत 6 नवंबर को कौन बनेगा करोड़पति के 9वें सीजन का ग्रेंड फिनाले की हॉट सीट पर थे बच्चों के बचपन को बचाने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी। उनके साथ उनकी पत्‍नी सुमेधा भी मौजूद थीं। शो के दौरान सत्‍यार्थी ने होस्‍ट अमिताभ बच्‍चन से अपनी जिंदगी की कई पहलुओं को शेयर किया। सत्‍यार्थी ने वहां मौजूद लोगों के रौंगटे खड़े कर देने वाली दांस्ता सुनाई। सत्‍यार्थी ने एक लाचार लड़की की कहानी सुनाई जो अपने पिता के दरिंदगी का शिकार हुई थी। उन्‍होंने बताया कि जब उस लड़की को उसके ही पिता के कैद से आजाद कराया गया तो उसने कई दिल दहला देने वाली बातें बताईं। लड़की ने कहा  कि उसका पिता रोज उसके साथ बलात्‍कार करता था। एक दिन तो उसकी तबियत ठीक नहीं थी और उसने हाथ जोड़कर ऐसा न करने को कहा लेकिन फिर हैवान बाप ने अपनी हवस मिटाई।

शो के दौरान सत्‍यार्थी ने देश में बच्चों की दयनीय स्थि‍त के बारे कई खुलासे किए। उन्‍होंने बताया कि उन्‍होंने एक बच्‍ची को उसके घर से दयनीय हालत में आजाद करवाय था। वहां उसका बाप उसके साथ बलात्‍कार करता था। . हैवानियत तो तब हो गई जब एक दफा ये बच्ची बीमार थी और वह अपने पिता से दर्द में कराहती हुए हाथ जोड़कर कहती रही आज छोड़ दो लेकिन उसके पिता ने उसे नहीं छोड़ा और उसका रेप किया। यह वाक्‍या सुनकर वहां मौजूद सभी लोग सन्‍न रह गए। कुछ के तो आंखों से आसूं भी निकले।

कैलाश सत्यार्थी ने सर्कस में काम करने वाली नाबालिग लड़कियों की आपबीती सुनाई जो कि रोंगटे खड़े कर देने वाली है। उन्होंने बताया कि सर्कस में काम करने वाली लड़कियों को अच्छा या बुरा परफॉर्म करने पर मालिक इनाम देता था। अच्छा परफॉर्म करने में सर्कस का मालिक और कुछ लोग मिलकर इनाम के तौर पर नाबालिग लड़कियों का बलात्कार करते थे। बुरा परफॉर्म करने पर भी सजा के तौर पर बलात्‍कार ही किया जाता था। सत्यार्थी ने कहा कि वहां हालत बहुत खराब थीं, बच्चियों को कई-कई दिन तक भूखा रखा जाता था, उनके साथ गंदे काम होते थे, जब वो इसके विरोध में खड़े हुए तो उन्हें मालिकों की ओर से हमले का सामना करना पड़ा।

केबीसी 9 शो में पहुंचे कैलाश सत्यार्थी ने 1 करोड़ का पड़ाव खेलने से पहले ही गेम छोड़ने का फैसला लिया। वह इस शो से 50 लाख रुपये की धनराशि जीतने में सफल रहे। लगातार चाइल्ड राइट्स के ऊपर काम कर रहे कैलाश लाखों बच्चों का बचपन बचाने में कामयाब रहे हैं।


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