नशीली दवाओं का सीधा असर फेफड़े पर

By: jhansitimes.com
Feb 25 2019 09:13 pm
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( रिपोर्ट - प्रदीप श्रीवास्तव ) नई दिल्ली। नशा न सिर्फ हमें हर प्रकार से कमजोर करता है, बल्कि हमारे स्वास्थ्य को भी भयंकर नुकसान पहुंचाता है। भारतीय मूल के अमेरिकी डाक्टर श्रीधर ने नए रिसर्च से यह साबित किया है कि नशा करने के कारण फेफड़े व सांस नली की बीमारियां खतरनाक स्तर तक रोगी को नुकसान पहुंचाती हैं। 

2016 के ड्रग यूज एंड हेल्थ पर हुए राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, 12 या उससे अधिक आयु के 28.6 मिलियन लोग अवैध ड्रग के आदी हैं। अमेरिका में 20 वीं शताब्दी के मध्य तक अवैध नशीली दवाओं का उपयोग समाज में आम था। बाद में दिनों में कई नई और विदेशी दवाएं आसानी से उपलब्ध हो गईं और लत की दर अधिक हो गई। 

आमतौर पर नशीली दवाओं को सूंघा जाता या इंजेक्शन के माध्यम से लिया जाता है, दोनों ही स्थिति में फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है। इंजेक्शन से दवा लेने के कारण एचआईवी के संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। नशे के आदि आदमी को हमेशा नशा लेने की लत रहती है। ओपिओयड्स और अवसाद रोधी दवाओं का उपयोग भी समाज में नशीली दवाओं के दुरुपयोग को बढ़ा रहा है और विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में ड्रग ओवरडोज से मौत आम हो गई है। 

अरकंसास के नॉर्थ लिटिल रॉक में बैपटिस्ट हेल्थ क्लिनिक में आईसीयू चिकित्सा निदेशक व भारतीय मूल के अमेरिकी डाक्टर श्रीधर बडिरेड्डी ने नशे की दवाओं के दुरूपयोग से होने वाली जटिलताओं पर रिसर्च किया है। रेस्पिरेटरी केयर में ड्रग के दुरुपयोग और वर्तमान स्वास्थ्य परिदृश्य में इसके प्रभाव को लेकर डाक्टर श्रीधर ने विस्तृत अध्ययन किया है। उनके अध्ययन में यह बात सामने आई है कि नशीली दवाओं को सांस या इंजेशन के माध्यम से लेने के कारण फेफड़ों की बीमारी बहुत तेजी से हो रही है। और रोगी को इसकी जानकारी भी नहीं हो पाती है। बीमारी को देरी से पता चलने के कारण इलाज भी संभव नहीं हो पाता है। 

नशीली दवाओं को को सूंघने या इंजेक्ट करने से सांस की तकलीफ बढ़ जाती है। क्योंकि, इसमें प्रयोग होने वाला पाउडर काफी खतरनाक होता है। निमोनिया या ब्रोंकाइटिस और फेफड़े में इंफेक्शन की समस्या भी आम हो जाती है। नशीले पदार्थों का इंजेक्शन के साथ प्रयोग से फेफड़ों में सूजन हो जाता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ होती हैं। डाक्टर श्रीधर आईसीयू में ऐसे मरीजों का बेहतर इलाज करते हैं। वह दवाओं और फिजियोथैरेपी के माध्यम से मरीजों का उपचार करते हैं। उनकी सोच मरीजों को बेहतर उपचार देने के साथ ही उनको मुख्य धारा से जोड़ कर एक बेहतर इंसान बनाने की है। डाक्टर श्रीधर के रिसर्च व मेडिकल क्षेत्र में उनके योगदान की पूरे अमेरिका में सराहना हो रही है। 


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