जनसामान्य के लिए परेशानी का सबब बनी कार्यालयों की दूरी

By: jhansitimes.com
Apr 16 2018 05:38 pm
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(रिपोर्ट-सैय्यद तामीर उद्दीन) महोबा। जनपद में बेतरतीब तरीके से कार्यालयों की स्थापना होने से विभाग में काम करने वालें कर्मचारियों समेत यहां पहुंचने वाले फरियादियों को भी तमाम प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। भारी समस्या इन कार्यालयों तक पहुंचनें में यात्री वाहनों की सुगमता से उपलब्धता न होना शामिल है। 

तकरीबन 23 साल पहले जनपद का गठन हुआ था और उसके बाद यहा जनपद स्तरीय कार्यालयों का लगातार सृजन होता चला गया और एक के बाद एक जनपद स्तरीय कार्यालय महोबा में आकर स्थापित होते रहे लेकिन शुरूआत से ही उनकी स्थापना बेतरतीब तरीके से हुयी है। यहां जिले में स्थापित कार्यालयों की एक से दूसरे की दूरी कहीं, कही 5 किलो मीटर तक है, लिहाजा इन कार्यालयों तक पहुंचने वालें फरियादियों को भारी कठिनाइयों का सामना करने को विवश होना पड़ रहा है। 

उदाहरण के तौर पर जिले का सिंचाई विभाग बजरिया मोहल्ले में स्थापित है जबकि लघु सिंचाई विभाग छतरपुर रोड पर स्थापित है। इन दोनों ही कार्यालयों की एक दूसरे से दूरी कम से कम 5 किलो मीटर है, इसी तरह जनपद के अनेक कार्यालय एक से दूसरे कार्यालय के बीच 2 से 3 किलो मीटर की दूरी पर स्थापित है। 

जनपद सृजन के बाद यहां नवीन कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण हुआ और उसी काल में विकास भवन की भी नई इमारत निर्मित हुयीं इन दोनो ही इमारतों की दूरी एक दूसरे से कम से कम 4 किलो मीटर के फासले पर स्थित है। जनपद सृजन के बाद विकास भवन की नई बिल्डिंग बनने तक  विकास भवन समाज कल्याण विभाग की बिल्डिंग पर चलता रहा, विकास भवन की नई इमारत का निर्माण भूमि के समतल से कम से कम 100 मीटर की ऊंचाई पर एक पहाड़िया में की गयी है। यहां बुजुर्गों को पहुंचने में सांस फूल जाती है तमाम बुजुर्ग तो उसकी ऊंचाई पर पहुंच ही नहीं पा रहे है जिसके चलते उनके विकास भवन में चलने वालें कार्यालयों में से पड़ने वाले काम अधूरे बने रहते है। 

बीच में इस बात को ध्यान रखते हुये मांग उठी थी कि बेतरतीब स्थापित हुये जनपद स्तरीय कार्यालयों की दूरी को मददेनजर रखते हुये नगर में एक नगरीय बस सेवा का संचालन कराया जायें जिससे लोगों को आवागमन की परेशानियों से दो, चार न होना पड़े और लोग आसानी के साथ विकास भवन से लेकर कलेक्ट्रेट तक आते, जाते रहे। मांग की गंभीरता को देखते हुये इस पर शुरूआत में जिम्मेदारों द्वारा हामी भी भरी गयी थी लेकिन बाद में सब टांय, टांय फिस हो गया नतीजतन कार्यालयों की दूरी जनमानस के लिये परेशानी का सबब बनी हुयी है।   


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