बढऩे लगीं प्रत्याशियों की दिल की धड़कनें, शादी समारोह में भी चर्चायें जीत-हार की, 11 दिन का है और इंतज

By: jhansitimes.com
May 12 2019 05:00 pm
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चुनाव के परिणाम ग्यारवें दिन घोषित होंगे। हालांकि यह तिथि कई मायनो में अच्छी नहीं मानीं जाती है लेकिन ईवीएम अपना करिश्मा दिखाने में पीछें नहीं रहेंगीं। कोई भी संभावनायें बन सकतीं है। हाथी और साइकिल पर विराज सकते हैं कमल और अगर सुटवा वोट गठबंधन में गिरा होगा तो तापमान बढ़ने के कारण मुरझा सकता है कमल का फूल । हालांकि हाथ ने प्रयास बहुत किए इनको रोकने में परंतु हडडी मजबूत न होने के कारण कुछ ऐसा करिश्मा हीं दिखा पायें जिससे चुनाव की लड़ाई कश्मकश हो जातीं। निश्चित तौर पर भाजपा और गठबंधन के बीच लडाई बताई जा रही है।

मिलीं जानकारी के अनुसार 23 मई को नवीन गल्ला मंडी में परिणाम द्योषित हो जायेंगें। 29 अप्रैल को बुंदेलखंड के तीन सीटों पर और 6 मई को बाँदा लोकसभा में चुनाव सम्पन्न हुए थे। लगभग पौन महीने लोगो को इंतजार करना पड़ रहा है। जनता ने अपना निर्णय भी ईवीएम के खांचे में सुरक्षित कर दिया है सिर्फ बटन दबाने की जरूरत है। बटन दबते हीं प्रत्याशी की किस्मत बदल जायेंगीं और देर शाम तक जब परिणाम आयेंगे तो उसके सिर पर ताज रख जायेंगा जो कि पांच साल तक बरकरार रहेगा। 

चुनाव जीतकर मैदान छोडक़र प्रत्याशी चलें गए है अब वों चाहें हारे और जीतें अगले चुनाव में हीं नजर आयेंगें। जनता की क्या समस्यायें है इसके लिए वों न तो सक्रिय रहें है और न हीं सक्रिय रहने की आग दिखाई पड़ रहीं है। मजबूरी में वों जनता के हाथ जोड़ते है, अगर उनका बस चलें तो हाथ जोडऩा भी अपनी शान के खिलाफ समझते है। पहले जनप्रतिनिधि जनता को एक महत्व देतें थे उनकी समस्यायें सुनते थे, निराकरण करने का प्रयास होता था, विकास के मुददो को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से संवाद किया करतें थे, उनका विकास हो जाये और उनको भौतिक सुविधायें मिल जायें जो आज के समय में जरूरत है। क्या वादें किए कैसे निभाने है यह सब चुनावी तमाशा होता है जो खत्म हो चुका है। जीत गए तो पांच साल तक जनता उनका कुछ नहीं बिगाड सकतीं है। हार गए तो दिखाई नहीं देंगे। यहीं कारण है कि चुनाव में प्रत्याशी को कड़ी मेहनत करना पड़तीं है।

लोकसभा चुनाव जो छठवें चरण में चल रहा है, यहां चुनाव चौथे चरण में सम्पन्न हुआ था। चुनाव में किसी ने कोई भी आरोप-प्रत्यारोप प्रशासन पर नहीं लगाए। हालांकि औसतन मतदान अच्छा नहीं रहा है, जितनी की आशा की जा रहीं थी। लोकसभा चुनाव का एक बड़ा क्षेत्र होता है और मतदाता से अगर कोई भी वादें चुनाव जीतने वालें प्रत्याशी ने किए है तो उसका कर्तव्य है कि उन वादों पर खरा उतरें। अगर वों कोई योजना इस जनपद के लिए लाता है तो निश्चित तौर पर उसकी वाहवाही होगा और मतदाता उसको हमेंशा याद रखेगा। चुनाव कई लोग लड़ते है जीतता लेकिन एक ही है। बांकी सब हारते है।

चुनाव एक सामान्य प्रक्रिया है इसमें कभी वैमनुष्यता हावी नहीं होना चाहिए, कभी कोई किसी पार्टी में होता है तो वह दूसरी पार्टी में चला जाता है। एक दूसरे दल से चुनाव भी लड़ते है लेकिन चुनाव के बाद जो एक दुश्मनी का दौर आरंभ होता है वो हमेशा घातक समझा जाता है। चौथा चरण पूरा हो गया है, ईवीएम सुरक्षित जगह पहुंच गई है। अब सिर्फ गिनती का काम बांकी रह गया है जिसकी तैयारियां होने लगीं है और डेढ़ सप्ताह बाद यह तय हो जायेंगा कि जालौन-गरौठा-भोगनीपुर से किस प्रत्याशी को जिताने के लिए मतदाताओं ने अपना मत दिया है। हालांकि सपा-बसपा गठबंधन जो कि दावे ठोंक रहे है कि इस बार हाथी-साइकिल एक साथ चल पड़ रहीं है और कमल कुचल गया है। वहीं कमल जो कि जब खिलता है तो कीचड़ में हीं उसकी सुंदरता दिखाई पड़ती है, ऐसा न हो कि साइकिल और हाथी कीचड़ में फंस जायें और कमल बाहर निकल पड़े। इन दोनो को रोकने के लिए हाथ ने अपनी चाल बढाई थी जो कि कांग्रेस का सिंबल है परंतु चाल तो बढ़ी और 2014 में जो वोट मिला था उससे इजाफा हुआ लेकिन मतदाताओं के रूझान के अनुसार वों इस लड़ाई में तीसरे स्थान पर माने जा रहे है। हालांकि यह एक अनुमान है, चुनाव में कुछ भी संभव है परंतु मतदाता का रूझान किस ओर रहा है यह 23 मई की शाम को घोषित हो जायेगा।


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