मुकद्दस रमजान मुबारक की तैयारियां जोरों पर

By: jhansitimes.com
May 16 2018 08:26 pm
86

(रिपोर्ट-सैय्यद तामीर उद्दीन) महोबा। इबादतों से भरा मुकद््दस रमजानुल मुबारक की तैयारियां जोरों पर चल रही है। मस्जिदों को सजाया और  सवारा जा रहा है यहां रंगाई और पुताई का काम मुकम्मल हो चुका है। चांद दिखते ही मस्जिदों में तराबीह का दौर शुरू हो जायेगा। मस्जिदों में हाफिजों द्वारा तराबीह पढ़ाई जाती है लिहाजा जिन मस्जिदों में हाफिजों को तराबीह का पाठ्य सुनाना है वे अपनी-अपनी मस्जिदों में आ चुके है। हाफिजों को तीस पारे का कुरान मजीद कंठस्थ होता है। 

 रमजान का महीना नेकी कमाने का भी महीना है रोजा सिर्फ भूखा रहने  का नाम नही है बल्कि यह हमें दूसरों की भूख प्यास का भी एहसास कराता है। रमजान गुनाहों से तौबा का भी महीना है। वर्ष में रमजान के एक महीने में की जाने वाली इबादत का पुण्य लाभ 70 गुना खुदाबंद करीम अपने बंदे को अता करता है। 

तराबीह का सिलसिला मस्जिदों में रमजान का चांद दिखने के साथ शुरू होता है और ईद का चांद नजर आने के बाद यह सिलसिला समाप्त होता है। इस बीच तमाम मस्जिदों में सबीने का भी आयोजन किया जाता है सबीने का मतलब है एक, दो और तीन दिनों में कुरान का पूरा पाठ्य का हो जाना, मस्जिदों में तराबीह ईशा के बाद शुरू होती है और कुरान का पाठ्य मुकम्मल होने तक रोजाना इसका सिलसिला 20 रकातों में चलता रहता है। 

अब जबकि रमजानुल मुबारक सनिकट आ रहा है लिहाजा उसकी तैयारियां शहर में दिखाई पड़ने लगी है। घरों की साफ-सफाई से लेकर इबादतगाहों की रंगाई-पुताई तक की गयी है, मस्जिदों में बिजली की झालरे आदि डालकर उन्हें सजाया संवारा गया है। बाजारों में मेवा, खजूर व फलों की मांग बढ़ गयी है। हालांकि अबकी बार इन खाद्य सामग्रियों में महंगाई की मार दिखाई पड़ रही है, कारण यह है कि ज्यादातर खाद्य सामग्रियां जीएसटी से प्रभावित हुई है लिहाजा उनके दामों में पिछले साल की तुलना में चालू साल में महंगाई ज्यादा प्रभावी दिखाई पड़ रही है लेकिन रमजानुल मुबारक की खुशियों को आत्मसात करने के लिये महंगाई मायने नही रख रही है। सिमई बाजार में बिकने लगी है और सूतफैनी की मांग भी बढ़ चली है। रमजान में बाजारें गुलजार रहती है और दर्जियों को भी नये परिधान सिलने को लेकर फुर्सत नही रहती है हालांकि बीते कुछ वर्षो के भीतर सिलेसिलाये कपड़ों की मांग बढ़ चली है लेकिन फिर भी अभी तमाम लोग दर्जी के हाथों सिले कपड़े पहनने को वरीयता देते है। 


comments

Create Account



Log In Your Account



छोटी सी बात “झाँसी टाइम्स ” के बारे में!

झाँसी टाइम्स हिंदी में कार्यरत एक विश्व स्तरीय न्यूज़ पोर्टल है। इसे पढ़ने के लिए आप http://www.jhansitimes .com पर लॉग इन कर सकते हैं। यह पोर्टल दिसम्बर 2014 से वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई की नगरी झाँसी (उत्तर प्रदेश )आरंभ किया गया है । हम अपने पाठकों के सहयोग और प्रेम के बलबूते “ख़बर हर कीमत पर पूरी सच्चाई और निडरता के साथ” यही हमारी नीति, ध्येय और उद्देश्य है। अपने सहयोगियों की मदद से जनहित के अनेक साहसिक खुलासे ‘झाँसी टाइम्स ’ करेगा । बिना किसी भेदभाव और दुराग्रह से मुक्त होकर पोर्टल ने पाठकों में अपनी एक अलग विश्वसनीयता कायम की है।

झाँसी टाइम्स में ख़बर का अर्थ किसी तरह की सनसनी फैलाना नहीं है। हम ख़बर को ‘गति’ से पाठकों तक पहुंचाना तो चाहते हैं पर केवल ‘कवरेज’ तक सीमित नहीं रहना चाहते। यही कारण है कि पाठकों को झाँसी टाइम्स की खबरों में पड़ताल के बाद सामने आया सत्य पढ़ने को मिलता है। हम जानते हैं कि ख़बर का सीधा असर व्यक्ति और समाज पर होता है। अतः हमारी ख़बर फिर चाहे वह स्थानीय महत्व की हो या राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय महत्व की, प्रामाणिकता और विश्लेषण के बाद ही ऑनलाइन प्रकाशित होती है।

अपनी विशेषताओं और विश्वसनीयताओं की वजह से ‘झाँसी टाइम्स ’ लोगों के बीच एक अलग पहचान बना चुका है। आप सबके सहयोग से आगे इसमें इसी तरह वृद्धि होती रहेगी, इसका पूरा विश्वास भी है। ‘झाँसी टाइम्स ‘ के पास समर्पित और अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ संवाददाताओं, समालोचकों एवं सलाहकारों का एक समूह उपलब्ध है। विनोद कुमार गौतम , झाँसी टाइम्स , के प्रबंध संपादक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। जो पूरी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता का पिछले लगभग 16 वर्षों का अनुभव है। के पी सिंह, झाँसी टाइम्स के प्रधान संपादक हैं।

विश्वास है कि वरिष्ठ सलाहकारों और युवा संवाददाताओं के सहयोग से ‘झाँसी टाइम्स ‘ जो एक हिंदी वायर न्यूज़ सर्विस है वेब मीडिया के साथ-साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना विशिष्ट स्थान बनाने में कामयाब रहेगा।