दस साल से फंसा है धरतीपुत्र प्राकृतिक आपदा के चक्र में, सब्र का पैमाना बना गुस्से का लावा

By: jhansitimes.com
Feb 13 2018 05:22 pm
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रिपोर्ट-सैय्यद तामीर उद्दीन महोबा। किसान ओलावृष्टि से कहीं का नहीं रहा है, वह बीते कोई एक दशक से प्राकृतिक आपदाओं का शिकार है। सोमवार को ओलावृष्टि ने रही, सही कसर पूरी कर दी, बर्बाद किसान के सब्र का बांध टूट गया और वह तबाही के बाद मुआवजे की मांग को लेकर सड़क घेरे बैठा है, किसान जहां बर्बाद हो गया और वह सड़कों पर उतर कर मुआवजे की मांग कर रहा है, जिससे जनपद की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से पंग्गू हो गयी है, उधर उन्हें समझाने, बुझाने और आश्वासन को लेकर मंगलवार को सारा दिन पुलिस व प्रशासन परेशान रहा है। कही-कहीं किसानों से पुलिस के आला अफसरों की तीखी नोक, झोंक भी हुयी है। 

जनपद चार विकास खण्डों का है और चारों विकास खण्डों में सोमवार को ओलो ने खड़ी फसलों को नष्ट कर दिया, कही से भी किसान से अभी तक राहत की किरण जागती नहीं दिखी है, तो वह अपनी मांगो को लेकर समूचे जनपद के राज मार्ग और राष्ट्रीय राज मार्गो को घेरे रहा, गांव के गांव तबाह हुये है, तो सड़कों पर कितना किसान उतरा इसका आकलन करना मुश्किल हो रहा है, पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को उन्हें समझाने में पसीने छूट रहे है, दरअसल एक जगह के किसान जब किसी तरह मान रहे है तो दूसरी जगह से प्रशासन को खबर मिल रही है कि फला गांव के किसान भी सड़कों पर खड़े है लम्बे जाम लगे है और मुसाफिर इनमें फंसकर परेशान हो रहे है। सुबह से लेकर शाम तक यही खबरें पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को परेशान किये रही है, एक गांव से दूसरे गांव के लिये उनकी गाड़िया फर्राटा भरती रही, फिल हाल पुलिस व प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी इस बात पर ध्यान दे रहे है कि किसानों को किसी तरह समझा बुझाकर सड़कों से उनके कब्जे से मुक्त कराया जाये, ताकि जिले में यातायात की व्यवस्था ज्यादा समय तक अवरुद्ध न रह पाये, फिलहाल किसान के पास पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासन पर भरोसा करने के सिवा और कोई रास्ता भी नहीं बचा है। 

पिछले एक दशक से जनपद में एन फसल तैयार होने की घड़ी में प्राकृतिक आपदा तबाही की इबारत लिखता चला आ रहा है, और किसान लगातार बर्बाद होता जा रहा है, अबकि बार वैसे भी किसान ने अवर्षा के चलते बेहद मेहनत मशक्कत के बाद फसलें बोयी थी किसी तरह उसने खेतों की सिंचाई के लिये पानी का बंदोबस्त किया था, अब जबकि फसलें कटाई का समय सनिकट आया तो वह एक बार फिर प्राकृतिक आपदा का शिकार हो गया अब उसे कुछ  नहीं सूझ रहा है, दस साल से प्राकृतिक आपदा की फेर मेें फंसा किसान की कमर तोड़ दी है, और अन्न दाता किसान अब एक, एक दाने को लेकर मोहताज हो गया है, लिहाजा उसका गुस्सा लावा बन रहा है। 

 मकान की दीवार गिरी आधा दर्जन मरी बकरी 

 कबरई थाना क्षेत्र के गांव छानी, लिलवाही, मकरबई, धरौन, उटिया, बघारी, सुरहा, ग्योड़ी, सहित कस्बा कबरई में सोमवार की रात तेज बारिश के साथ हुयी ओलावृष्टि से किसान बर्बाद हो चुके है। किसानों के चेहरों पर मायूसी छायी हुयी है और उनकी सुनने वाला कोई नहीं है, नाराज किसानों ने नारेबाजी करते हुये प्रदर्शन किया है। इतना ही नहीं कस्बा कबरई निवासी छोटे लाल के पशुबाड़े में आधा दर्जन बकरी बंधी थी, ओलावृष्टि व बारिश से जहां उसके कच्चे मकान के खपरे टूटे तथा दीवार टूटकर गिर जाने से आधा दर्जन बकरी भी काल के गाल में समा गयी। इतना ही नहीं गांव छानी, लिलवाही, मकरबई, धरौंन, उटिया, बघारी, सुरहा, ग्योड़ी, गांव में भी ओलावृष्टि से किसानों के खेतों पर लगी फसल बर्बाद हो गयी है, किसान अपनी फसले देख आंसू बहा रहा है। वह यह सोचकर परेशान है कि आखिर कुदरत की यह मार उन पर कब तक पड़ती रहेगी, फसल बर्बाद हो जाने से दूसरे को अन्न देने वाला अब स्वयं एक, एक दाने के लिये परेशान हो रहा है। कबरई थाना क्षेत्र के कुनेहटा गांव के नजदीक नाराज किसानों ने सड़क पर जाम लगा दिया और नारेबाजी करते हुये प्रदर्शन किया, घण्टे लगे रहे जाम में दर्जनों वाहन फंसे रहे प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचने के बाद उन्हें आश्वासन दिया तब कहीं जाकर जाम खुला।


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