कर्णधारों को आजादी का आईना दिखा रहा झांसी जिले का यह गांव, पढ़े- धर्म विजय के साथ ... ग्राउंड रिपोर्ट

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Aug 09 2017 05:01 pm
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झांसी। यह गांव है या बीहड़ों के बीच वनवासियों का डेरा। कहने के लिए तो इसे गांव ही कहते हैं पर यह एक ऐसे गांव की तस्वीर है। जिसके देखने पर उसकी तकदीर उभर कर सामने आ जाती है। न लोगों को पीने और खेती के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था है और न हीं गांव तक पहुंचने के  लिए सड़क मार्ग। किसी भी कार्य के लिए ग्रामीणों को पदयात्रा करके निकट कस्बा समथर तक जाना पड़ता। आजादी के बाद से आज तक गांव बुडैरी घाट कला विकास के लिए तरस रहा है।

बीहड़ों के बीच बसे गांव के लोग निरीह जीवन व्यतीत कर रहे हैं। अगर कोई बीमार हो जाए तो समझे की आफत आ गई। ग्रामीण मरीज को खाट पर लिटाकर 15 किमी पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक पहुंचते हैं। ग्रामीणों के सूने चेहरे पर अतीत की दुखद यादें वर्तमान की टीस और समान्तर भविष्य की मायूसी स्पष्ट झलकती है। जब इस गांव में कुछ देखने और जानने के लिए झांसी टाइम्स की टीम पगडंडियों से गुजरती हुई वहां पहुंची तो गांव का नजारा देखकर टीम के सदस्य हतप्रभ रह गये। जहां आज विकास के ढिढोरे पीटे जा रहे हैं वहीं बुन्देलखंड के झांसी जनपद का एक ऐसा गांव है जहां इंसान अपना जीवन जानवर की तरह जी रहे हैं। इस गांव में लोग शादी संबंध करना पसंद नहीं करते। यह मात्र इसलिए कि गांव तक पहुंचने का संसाधन नहीं है। 

खाट पर लिटाकर ले जाते गम्भीर मरीजों को 

गांव में पहुंचने पर देखा कि कुछ लोग अपने मरीज को खाट पर लिटाकर ले जा रहे थे। जब उनसे जानकारी ली गई तो बुर्जुग ने अपना नाम उदई ने बताया कि उसकी 80 साल उम्र्र होने जा रही है। इस दौरान उसने कभी गांव में कोई एम्बुलेंस आते नहीं देखी है। उसका कारण यह है गांव तक कोई भी मार्ग नही है। उनकी इस हालत के जिम्मेदार के लिए वह जनप्रतिनिधियों को मानते हैं। क्योंकि चुनाव के दौरान उन्हें हम याद आते और जैसे ही सत्ता में वे आ जाते है तो उनकी याद चली जाती है। 

 गांव बुडैरी का कष्टकारी दुर्गम मार्ग

झांसी टाईम्स की टीम जब झांसी जनपद के समथर कस्बे से गांव बुडैरीघाट की तरफ बढ़ी तो जैसे -जैसे कदम आगे बढते जाते वैसे -वैसे रास्ता कष्टकारी होता गया। कंकड़ पत्थर के बाद मिट्टी की एक पगडंडी सी मिली जिसे पकड़ कर हम आगे चलते चले गये। और जा पहुंचे पहुंज नदी के किनारे बसे बुडैरी घाटकला गांव में। 

गांव की हालत देखकर विकास कार्यों की हकीकत नजर आई। यहां दूर-दूर तक सड़कों के नाम पर मिट्टी व ऊबड़-खाबड़ मार्ग नजर आया। गांव के लोगों से जब बात की गई तो इस गांव में हुए विकास की सच्चाई उजागर की। ग्रामीणों का कहना है कि उनका गांव समथर स्टेट से 10 किमी दूर बीहड़ों के बीच है। वहीं, सबसे अधिक समय तक क्षेत्र के लोकप्रिय जनप्रतिधि राजा रणजीत सिंह जुदेव रहे हैं। जो अभी भी समथर के दुर्ग में निवास करते है।यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि यह इलाका अब तक उन्हें नजर नहीं आया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रदेश में कांग्रेस, भाजपा, बसपा सपा की सरकारें आई और गई। लेकिन इस गांव में कभी विकास न आया और न ही गया है। 

अब सूबे मेें भाजपा की सरकार है और क्षेत्र से जवाहर सिंह राजपूत विधायक। जो खुद को किसान और गरीबों का प्रतिनिधित्व करने वाला मानते हैं। फिर भी इस गांव में 4 माह से अधिक होने जा रहे है। इसके बाबजूद भाजपा विधायक ने इस गांव में किसी भी प्रकार न तो विकास की किरण भेजने का प्रयास किया और न ही स्वयं इस गांव की हालत देखने के लिए आये हैं।

 

 

रिपोर्ट- विशेष सवांददाता  धर्म विजय सिंह के साथ मोनू और अजय झा 

 


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