पर्यावरण में नॉनटेबर्यूक्लियस माइकोबैक्टेरिया से पल्मोनरी रोगों का खतरा

By: jhansitimes.com
Dec 25 2018 09:25 pm
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रिपोर्ट - प्रदीप श्रीवास्तव ,नई दिल्ली। पर्यावरण में नॉनटेबर्यूक्लियस माइकोबैक्टेरिया से कई प्रकार के पल्मोनरी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। अमेरिका में कार्यरत भारतीय मूल के डाॅक्टर मोहन रुद्रप्पा ने यह अध्ययन किया है। उनके इस रिसर्च की राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है। 

हाल के नए शोध ने नॉनटेबरकुलस माइकोबैक्टेरिया का अस्तित्व साबित कर दिया है, जो आसानी से पर्यावरण के माध्यम से मनुष्यों को संक्रमित करता है। माइकोबैक्टेरियम प्रजातियों को नॉनट्यूब्यूक्लियस माइकोबैक्टेरिया (एनटीएम) कहा जाता है। यह प्राकृतिक रूप से जल, पानी और मिट्टी में मौजूद होते हैं। यह आसानी से फैलते हैं। माइकोबैक्टीरियम एवियम-इंट्रासेल्यूलर कॉम्प्लेक्स (मैक) एक सामान्य माइकोबैक्टीरियम है, जो नम वातावरण में रहता है। सामान्य दशा में 

यह रोगजनक नहीं है। एनटीएम एंटीबाॅयोटिक प्रतिरोधी है। इसकी उपस्थिति जल वितरण प्रणाली में पाई जाती है। यह आसानी से जल निकासी प्रणाली में प्रवेश कर सकता है। अमेरिका के जोप्लिन में मर्सी अस्पताल से जुड़े भारतीय मूल के अमेरिकी डाॅक्टर मोहन रुद्रप्पा ने नॉनटेबरकुलस माइकोबैक्टेरिया का काफी गहन अध्ययन किया है। उन्होंने भारत से अपनी मेडिकल की डिग्री पूरी की है। डॉ रुद्रप्पा को यूनियन (अंतर्राष्ट्रीय क्षय रोग और फेफड़ों के रोग) द्वारा स्वर्ण पदक मिला है। साथ ही उन्हें इंटरनेशनल यूनियन ने पल्मोनरी दवा में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया है। 

डॉ रुद्रप्पा के अध्ययन से पता चलता है कि हॉट टब फेफड़ों की बीमारी (एचटीएल) स्पा में प्रदूषित गर्म पानी के संपर्क में आने से होती है। चूंकि उपचार में गर्म पानी का उपयोग किया जा रहा है। इसलिए, एचटीएल की सटीक घटनाओं का आसानी से मूल्यांकन नहीं हो पाता है। सामान्य बुखार और खांसी के साथ डिस्पने एचटीएल के आम लक्षण होते हैं, इसलिए भी आमतौर पर इसे रिपोर्ट नहीं किया जाता है। अध्ययन से पता चलता है कि एनटीएम गर्म पानी के हीटर और गर्म पानी के पाइप में 50 से 55 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर जीवित रहता है। माइकोबैक्टीरियम इंट्रासेल्युलर के कोशिकाओं को बूंदों के गठन के माध्यम से आसानी से पानी से हवा में एयरोसोलिज्ड किया जाता है। एनटीएम के कारण होने वाले संक्रमण और बीमारी के कारण इसे लंबे समय तक कई एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता होती है। 


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