झांसी नगर निगम चुनाव में रोमांच का दौर शुरू : प्रदीप जैन का शानदार दांव या राजनैतिक शहादत ?

By: jhansitimes.com
Nov 05 2017 11:51 am
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झांसी। अत्यंत चौंकाने वाली ख़बरों के साथ स्थानीय निकाय चुनाव 2017 झांसी जनपद में काफी दिलचस्प हो गया है। यहां पर पूर्व विधायक व पूर्व मंत्री तक महापौर पद के लिए मैदान में उतार दिये गये हैं। अपनी डूबती नैया  सहारे के लिए झांसी नगर निगम से मेयर पद के लिए कांग्रेस ने चुनावी मैदान में पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य को मैदान में उतार दिया है | जिसके बाद कांग्रेस के अंदरखाने में उथलपुथल मची हुई है। स्थानीय कांग्रेसियों में अंदर ही अंदर विद्रोह का लावा फूट रहा है। वहीं, महानगर में जनता भी प्रदीप जैन को पचा नहीं पा रही है। 

हाल के हालातों को देखें तो पूर्व मंत्री प्रदीप जैन झांसी में अगले लोकसभा चुनाव के लिए अपनी सियासी जमीन बनाने में लगे हैं |  वर्तमान सांसद और केंद्रीय मंत्री उमा भारती अगला लोकसभा चुनाव झांसी से नहीं लड़ेंगी यह चर्चा आम है और मोदी लहर के कमजोर पड़ने के साथ ही प्रदीप की लगातार सक्रियता उन्हें झांसी लोकसभा चुनाव के लिए मजबूत प्रत्याशी बना रही थी। लेकिन अब केंद्रीय मंत्री रहे प्रदीप सीधे मेयर का चुनाव लड़ेंगे। 

प्रदेश में प्रचंड बहुमत से आई योगी सरकार के सामने मृतप्राय पड़ी कांग्रेस को जीवित करने के लिए खुद का सियासी कद कम करने को क्यूं मजबूर हुए  बुंदेलखंड  मजबूत नेता प्रदीप जैन ? 

निकाय चुनाव में कांग्रेस ने एक पूर्व मंत्री को अर्स से उठा फर्श पर बैठा दिया है। झांसी महापौर चुनाव में बसपा से बृजेंद्र कुमार व्यास के टिकट फाइनल होते ही अन्य राजनीतिक दलों में हलचल मच गई। कांग्रेस की लखनऊ कमेटी को झांसी में कोई अन्य चेहरा नहीं दिखाई दिया जिसे वह मेयर पद के लिए मैदान में उतार सके। कुल मिलाकर कांग्रेस को बस एक ही नेता यहां दिखाई पड़ता है। जब मन आये विधायक का टिकट का दे दिया,, फिर सांसद का और अब निकाय चुनाव की बारी आई तो मेयर का टिकट देकर मैदान में उतार दिया। इस प्रकार की प्रदेश नेतृत्व के निर्णय से स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में मायूसी है। उनके अंदर तिरस्कार की भावना पनपने लगी है। 

हाल फिलहाल अपने राजनैतिक वजूद को बनाये रखने के लिए यदि मेयर का चुनाव जीत गए तो प्रदीप फिर से चर्चा में होंगे और लोकसभा चुनाव के लिए स्वतः सबसे प्रमुख दावेदार। इसके साथ ही वे आलाकमान को यह सन्देश देने में कामयाब होंगे कि मुश्किल परिस्थितियों में वे न केवल पार्टी के लिए लड़ाई लड़ना जानते हैं बल्कि जीतना भी जानते हैं। यकीन मानिये बंद मुट्ठी लाख की ,खुल गई तो ख़ाक की वाली कहावत का दूसरा नाम होंगे प्रदीप जैन। कांग्रेस में स्वयं विद्रोह पनपने लगा है। जनता जो करे, लेकिन लगता है कि अंदरखाने की नराजगी ही पूर्व मंत्री की लुटिया डूबो देगी। फिलहाल नगर की सरकार के लिए झांसी में लड़ाई रोचक हो गई है। 


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