उज्जवला के साए में अंधेरा कायम, चूल्हे के धुंए से हर साल 8 लाख लोगों की जा रही जान

By: jhansitimes.com
Jun 06 2019 10:17 am
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8 लाख लोगों की चूल्हे के धूंए से जा रही जान, आधी आबादी पर चूल्हे के धूंए का खतरा, क्या यही है सबका साथ सबका विकास, उज्जवला के दावे खोखले!

बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज की...जिसमें उज्जवला योजना ने भी बड़ी भूमिका निभायी...लेकिन जमीनी हकिकत बड़ी भयावह है...सरकार के दावे और वादे चाहे जो भी हो... लेकिन सच्चाई ये भी है कि आज भी हर साल 8 लाख लोगों की जान चूल्हे से निकलने वाले धूंए से हो रही है...

इस बात की तस्दीक एक ताजा रिपोर्ट करती है जिसमें मोदी सरकार के दावों की हवा निकलती नजर आती है...दरअसल कोलैबोरेटिव क्लीन एयर पॉलिसी सेंटर द्वारा एक रिपोर्ट जारी की गई जिसके अनुसार भारत में प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों में सबसे ज्यादा मौत घरेलू वायु प्रदूषण से हो रही है...

सहां पर ये जानना जरुरी है कि घरेलू वायु प्रदूषण मुख्य रूप में घर में खाना बनाने के दौरान फैलता है...जैसे घरों में चूल्हे में लकड़ी, पौधों की सूखी पत्तियां और गोबर के उपला जैसी चीजों को जलाकर खाना बनाने से घरेलू वायु प्रदूषण ज्यादा होता है...

रिपोर्ट के अनुसार देशभर में कुल 16 करोड़ से ज्यादा घरों में आज भी खाना बनाने में ऐसी चीजों का ही उपयोग होता है...इस आंकड़े को आबादी के रूप में देखा जाए तो कुल 58 करोड़ लोग या यूं कहें कि लगभग आधी आबादी आज भी लकड़ी, सूखी पत्तियां या उपले पर खाना बनाने को मजबूर है...और इस भयावह स्थिति की सबसे बड़ी शिकार महिलाएं हैं...

बहरहाल जरुरी है कि देश की आधी आबादी को सुरक्षा दी जाए...ग्रामीण जीवन स्तर को सुधारा जाए....तभी सरकार के दावे सही साबित होंगे...और सबका साथ सबका विकास की बातों पर जनता जनार्दन विश्वास कर पाएगी...नहीं तो लोकतंत्र में हर पांच साल में जनता के बीच जाना है और फिर जनता पूछेगी जरुर कि इय भयानक स्थिति का जिम्मेदार कौन...??? 


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