उमा भारती ने मध्य प्रदेश वालों पर लगाया बुंदेलखंड राज्य न बनने देने का आरोप

By: jhansitimes.com
Apr 17 2018 12:10 pm
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रिपोर्ट- न्यूज एडिटर मदन यादव, झांसी। आप भाजपा की सरकार बनवाओ, मुझे यहां से सांसद बनवाओ, कसम खाती हुं कि अगले तीन वर्षों में पृथक बुंदेलखंड राज्य का निर्माण मैं कराऊंगी। अलग राज्य बनेगा तो यहां के नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर खुलेंगे। विकास होगा, आर्थिक समृद्धि आएगी। कुछ ऐसा ही भाषण था वर्ष 2014 में झाँसी-ललितपुर संसदीय सीट पर भाजपा प्रत्याशी उमा भारती का। बुंदेलखंड के नाम पर जमकर राजनीति की, वादे किए, वोटरों को पृथक राज्य के नाम पर बरगलाया, मगर जीतने के बाद बुंदेलखंड को भूल गई। अब चुनावी साल है। इस वर्ष मप्र में चुनाव हैं तो अगले वर्ष लोकसभा चुनाव। चुनावी घोषणाएं करने और लोगों को लोक-लुभावने वादे करके अपनी ओर आकर्षित करने वाली उमा भारती ने एक बार फिर बुंदेलखंड का कार्ड खेल दिया। इस बार पूरा पेंच मप्र पर फंसाते हुए शिवराज पर निशाना साध लिया। साफ कह दिया कि राज्य तो बन गया होता, मगर मध्य प्रदेश वाले बुंदेलखंड का हिस्सा बनना नहीं चाहते। 

गौरतलब है कि बुंदेलखंड पृथक राज्य बनवाने के नाम पर कभी भाजपा, तो कभी कांग्रेस तो कभी बसपा ने बुंदेलखंडियों को बड़े-बड़े वादे कर बरगलाया। सभी ने चुनाव जीते और भूल गए इस बुंदेली धरा के कर्ज को। इनमें बसपा ने तो फिर भी सकारात्मक कोशिश की, मगर भाजपा और कांग्रेस तो दो मुंहे सांप की भूमिका निभाती रही। वहीं समाजवादी पार्टी कभी भी पृथक राज्य निर्माण की समर्थक नहीं रही।

अब बात करते हैं कि सबसेबड़ा धोखा देने वाली उमा दीदी की। इन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान कहा था कि यदि जीत गई और भाजपा की सरकार बनी तो आगामी तीन वर्षों में वह खुद पृथक राज्य बनवा देंगी। सरकार बने और उनको जीते चार वर्ष हो गए। अभी तक राज्य पुनर्गठन आयोग का ही अता-पता नहीं है। राज्य क्या बनेगा? तेलंगाना के सांसदों ने अपनी बात न माने जाने पर इस्तीफा दे दिया था। वहां के विधायक भी इस्तीफा देने से नहीं चूके। आखिर सरकार को उनके आगे झुकना पड़ा और तेलंगाना पृथक राज्य बन गया। एक हमारे यहां के प्रतिनिधि हैं, जिन्हें कुर्सी बहुत प्यारी है। इस्तीफा देना तो दूर, यदि सवाल ही कर दो पृथक राज्य का तो यूटर्न ले लेते हैं। 

केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने अपने वायदे से मुकरते हुए बीते रोज सार्वजनिक मंच से कह दिया कि हम राज्य तो बनवा देते, मगर मध्य प्रदेश के लोग बुंदेलखंड का हिस्सा बनने को तैयार नहीं हो रहे। इसे दीदी का यूटर्न कहें या फिर मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों को सन्निकट देखते हुए शिवराज सिंह चौहान पर किया गया वार। सच जो भी हो, लेकिन सच्चाई बुंदेलखंड की लड़ाई से निश्चित ही दूर है। ऐसे में राज्य निर्माण की पहल तो नहीं हो रही, मगर दीदी के आक्रामक तेवर अवश्य पार्टी और मध्य प्रदेश भाजपा समझ रही है। उनकी मंशा भी कुछ हद तक साफ हो रही है। अपने मुंह से मीडिया के समक्ष किसी भी चुनाव में न उतरने का ऐलान करने वाली उमा दीदी मध्य प्रदेश में संभवत: कुछ हंगामी करने की मंशा रखती है। 

ऐसा भाजपाईयों का मानना है। अब उन्हें मध्य प्रदेश में चुनाव में शायद सीएम की कुर्सी दिख रही है। इसलिए अपने संसदीय क्षेत्र और बुंदेलखंड को छोडक़र वे न तो सरकार की बात करती हैं और न ही अलग राज्य की। जब कुछ बोलती हैं तो मध्य प्रदेश जरूर उनकी जुबान पर आ जाता है। उमा के केंद्र में ले-देकर मध्य प्रदेश की राजनीति में दखलअंदाजी ही बची है। भविष्य में जो भी हो, मगर बुंदेलखंड के लोग इन्हें अपना प्रतिनिधि बनाकर ठगा महसूस कर रहे हैं। 

 


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