यूपी निकाय चुनाव : बुंदेलखंड में बसपा को क्यों करना पड़ा करारी हार का सामना , ये हैं 5 कारण

By: jhansitimes.com
Dec 02 2017 02:31 pm
2999

झाँसी : यूपी निकाय चुनाव के परिणाम आपके सामने हैं | बुंदेलखंड में बहुजन समाज पार्टी के सामने विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर करारी हार ने नया सिरदर्द खड़ा कर दिया है| हालांकि बसपा ने उत्तर प्रदेश में  महापौर की 16 सीटों में से 02 सीटें अपने नाम कर यूपी निकाय चुनाव में वापसी की है | लेकिन बुंदेलखंड में हुई करारी हार का कारण लचर संगठन और  पार्टी नेताओं की भितरघात मानी जा रही है | जिसके चलते पार्टी को बुंदेलखंड में केवल एक नगरपालिका और तीन नगर पंचायत की जीत से ही संतुष्टी करनी पडी | 

 बहरहाल, अगर अभी सिर्फ यूपी निकाय चुनाव की ही बात करे तो आखिर बुंदेलखंड में बसपा  की इस करारी हार के पीछे की कौन सी वजह रही, आखिर ऐसे कौन-कौन से कारण हैं कि निकाय चुनाव में बसपा का सूपड़ा ही साफ हो गया? तो चलिए नजर डालते हैं उन्हीं कारणों पर.

पहला कारण: बुंदेलखंड में बसपा सुप्रीमो और उनके सिपहसलारों  ने विधानसभा चुनाव में मिली हार से सबक नहीं लिया. जिस तरह से भाजपा ने इस चुनाव को गंभीरता से लिया, बसपा ने वैसी गंभीरता दिखाना शायद मुनासिब नहीं समझा. बीजेपी ने इस चुनाव में जीत हासिल करने के लिए हर तरह से लोगों के साथ संवाद स्थापित करने की कोशिश की और इसी का नतीजा है कि बीजेपी जीतने में सफल रही|  

दूसरा कारण: अगर हार की एक और वजह तलाशने की कोशिश करें तो बसपा में पदाधिकारी के रूप में बैठे विभीषणों ने बसपा की नइया डुबोने में कोई कसर नही छोड़ी। अपने जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और जनता से दूरी | यहां तक कि बसपा का वोट समझे वाले  इलाकों में  पार्टी वोट टूटता नजर आया। तो मुस्लिम वोट भी अपने पक्ष में मैनेज करने में पार्टी के कोर्डिनेटर और जिले के पदाधिकारी सफल नही हो पाए। वहीं पिछड़े वर्ग के वोटों ने बसपा को दगा देने में कोई कसर नही छोड़ी। ये भी हार की एक बड़ी वजह है.बुंदेलखंड और जिले के प्रमुख पदाधिकारियों ने  चुनाव  की तरफ एक बार भी नहीं देखा| 

तीसरा कारण: बसपा के लिए चुनाव में प्रत्याशियों के पक्ष में बड़े स्टार प्रचारकों की कमी भी बड़े रूप में सामने आई | वहीँ जिम्मेदार नेताओं ने  जनता को उस तरह लुभाने की कोशिश नहीं की, अपने रूठे कार्यकर्ताओं और मिशनरियों को तक को नहीं मनाया  | 

चौथा कारण: भाजपा ने जिस तरह से बूथ लेवल तक अपनी पहुंच बनाई और डोर-टू-डोर जाकर लोगों से सीधा संवाद किया, वैसा करने में बसपा  नाकाम रही. भाजपा पार्टी ने इस चुनाव में भी अमित शाह की रणनीति 'बूथ लेवल पर कार्यकर्ताओं को जोड़ना और सदस्य बनाना' को अपनाया और इसी के सहारे चुनाव जीतने में कामयाब रही. 

पांचवा कारण: यूपी विधानसभा में मिली बुरी हार के बावजूद बसपा ने बुंदेलखंड में अपनी खोई जमीन को तलाशने के लिए उतना जोर नहीं लगाया, जितना लगाने की जरूरत थी. बसपा के पदाधिकारियों  ने शायद होमवर्क नहीं किया. इस चुनाव में भी बसपा अपनी ठोस रणनीति से जूझती रही. बसपा  अपनी रणनीति में ये दो चीजें शामिल नहीं कर पाईं- बूथ लेवल तक के लोगों को पार्टी से जोड़ना और लोगों से सीधे संवाद करना.


comments

Create Account



Log In Your Account



छोटी सी बात “झाँसी टाइम्स ” के बारे में!

झाँसी टाइम्स हिंदी में कार्यरत एक विश्व स्तरीय न्यूज़ पोर्टल है। इसे पढ़ने के लिए आप http://www.jhansitimes .com पर लॉग इन कर सकते हैं। यह पोर्टल दिसम्बर 2014 से वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई की नगरी झाँसी (उत्तर प्रदेश )आरंभ किया गया है । हम अपने पाठकों के सहयोग और प्रेम के बलबूते “ख़बर हर कीमत पर पूरी सच्चाई और निडरता के साथ” यही हमारी नीति, ध्येय और उद्देश्य है। अपने सहयोगियों की मदद से जनहित के अनेक साहसिक खुलासे ‘झाँसी टाइम्स ’ करेगा । बिना किसी भेदभाव और दुराग्रह से मुक्त होकर पोर्टल ने पाठकों में अपनी एक अलग विश्वसनीयता कायम की है।

झाँसी टाइम्स में ख़बर का अर्थ किसी तरह की सनसनी फैलाना नहीं है। हम ख़बर को ‘गति’ से पाठकों तक पहुंचाना तो चाहते हैं पर केवल ‘कवरेज’ तक सीमित नहीं रहना चाहते। यही कारण है कि पाठकों को झाँसी टाइम्स की खबरों में पड़ताल के बाद सामने आया सत्य पढ़ने को मिलता है। हम जानते हैं कि ख़बर का सीधा असर व्यक्ति और समाज पर होता है। अतः हमारी ख़बर फिर चाहे वह स्थानीय महत्व की हो या राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय महत्व की, प्रामाणिकता और विश्लेषण के बाद ही ऑनलाइन प्रकाशित होती है।

अपनी विशेषताओं और विश्वसनीयताओं की वजह से ‘झाँसी टाइम्स ’ लोगों के बीच एक अलग पहचान बना चुका है। आप सबके सहयोग से आगे इसमें इसी तरह वृद्धि होती रहेगी, इसका पूरा विश्वास भी है। ‘झाँसी टाइम्स ‘ के पास समर्पित और अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ संवाददाताओं, समालोचकों एवं सलाहकारों का एक समूह उपलब्ध है। विनोद कुमार गौतम , झाँसी टाइम्स , के प्रबंध संपादक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। जो पूरी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता का पिछले लगभग 16 वर्षों का अनुभव है। के पी सिंह, झाँसी टाइम्स के प्रधान संपादक हैं।

विश्वास है कि वरिष्ठ सलाहकारों और युवा संवाददाताओं के सहयोग से ‘झाँसी टाइम्स ‘ जो एक हिंदी वायर न्यूज़ सर्विस है वेब मीडिया के साथ-साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना विशिष्ट स्थान बनाने में कामयाब रहेगा।