UP निकाय चुनाव 2017: भाजपा ने लहराया परचम, बसपा ने की जोरदार वापसी

By: jhansitimes.com
Dec 01 2017 09:48 pm
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उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव के परिणाम सामने हैं, प्रथम परीक्षा को  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पास कर लिया है | वहीं बहुजन समाज पार्टी के लिए यह चुनाव परिणाम राहत लेकर आया है | स्थानीय निकाय चुनाव में बसपा ने जोरदार वापसी करते हुए 2 महापौर सीटों पर जीत हासिल की है | इस चुनाव में बसपा ने पूरे प्रदेश में जोरदार प्रदर्शन किया है. प्रदेश के 16 महापौर में भले ही भाजपा की झोली में 14 सीटें गई हैं, लेकिन बसपा ने तमाम मोर्चों पर भाजपा को कई राउंड तक उलझन में रखा| 

जिस तरह से 2012 के बाद सिर्फ और सिर्फ हार का मुंह देखा और एक के बाद एक लगातार चुनाव हारती गई, उसके बाद माना जा रहा था कि बसपा सुप्रीमो मायावती का राजनीतिक सफर अब बड़े संकट में आ गया है। इस वर्ष यूपी विधानसभा चुनाव में बसपा का यह हाल हो गया था कि उसके पास इतने नंबर नहीं बचे कि खुद पार्टी सुप्रीमो मायावती अपने दम पर राज्यसभा पहुंच सके। ऐसे में मायावती ने पूरी चुनाव प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा कर दिया था और खुद की आवाज दबाए जाने का आरोप लगाते हुए राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन तकरीबन एक दशक बाद मायावती के लिए यूपी में निकाय चुनाव का परिणाम राहत की बात लेकर आया है।

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का तो मेयर के पद पर खाता भी नहीं खुला है। नगर पंचायत में निर्दलीय उम्मीदवारों को भी लोगों ने पसंद किया है। बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं।

किसे कितनी मिली सीट

- बता दें कि नगर निगम के मेयर पद के लिए 16 सीटों पर चुनाव होने थे।

- इसमें 14 सीटों पर बीजेपी के मेयर उम्मीदवारों की जीत हुई है।

- जबकि, 2 सीट पर बीएसपी जीतने में सफल रही है। जबकि, कांग्रेस और सपा खाता भी नहीं खोल सकी।

ये  रहा नगर पालिका का रिजल्ट

- प्रदेश में नगर पालिका के 198 सीटों पर इलेक्शन हुए थे।

- इसमें 77 सीटों पर बीजेपी जीत दर्ज की है।

- वहीं, कांग्रेस को मात्र 5 सीट। जबकि, बीएसपी को 38 सीट मिले हैं।

- इसके अलावा सपा को 47 सीट मिली है। इसमें 31 निर्दलीय उम्मदीवारों को भी जीत मिली है। 

नगर पंचायत का ऐसा रहा रिजल्ट

- नगर पंचायत के 438 सीटों पर चुनाव होनेवाले थे। इसमें बीजेपी के पास 123 सीट आई।

- कांग्रेस मजह 15 सीटों पर सिमट गई। जबकि, बीएसपी को 43 सीट मिली।

- वहीं, समाजवादी पार्टी 81 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसके अलावा 174 निर्दलीय कैंडिडट को जीत मिली है।

 आज भी शहरी दलित की पसंद है बसपा  

बसपा ने यूपी के निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया है, अलीगढ़ व मेरठ में बसपा का मेयर उम्मीदवार जीत गया। एक तरफ जहां यह माना जा रहा था कि यूपी के निकाय चुनाव में सीधी लड़ाई भाजपा और सपा के बीच है, ऐसे में जिस तरह से बसपा ने लोगों को चौंकाया है उसके कई राजनीतिक मायने हैं। मायावती के लिए यह चुनाव परिणाम इसलिए भी राहतभरा है क्योंकि दलितों का वोट पार्टी के साथ एक बार फिर से जुड़ा है। साथ ही मुसलमानों का भी साथ हाथी को मिला है, जिसकी वजह से बसपा एक बार फिर से अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि को मजबूत करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकेगी।

दलित-मुस्लिम गठजोड़ बसपा के लिए संजीवनी 

अलीगढ़ और मेरठ में बसपा ने अपना दम दिखाया है, इन क्षेत्रों को मुस्लिम-दलित बाहुल्य इलाके के तौर पर जाना जाता है। ऐसे में समाजवादी पार्टी का यहां कमजोर होना बसपा के लिए शुभ संकेत है। आलम यह है कि प्रदेश की 16 मेयर सीटों में से एक पर भी कांग्रेस और सपा अपना खाता नहीं खोल सकी, जबकि मायावती की पार्टी दो सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब रही है। अलीगढ़ में मेयर पद के लिए बसपा उम्मीदवार मोहम्मद फुरकान, ने भाजपा के उम्मीदार राजीव अग्रवाल को करीब 11 हजार वोटों से हरा दिया है, जबकि मेरठ से बसपा उम्मीदवार सुनीता वर्मा ने कांटे की टक्कर में बाजी मारी है।

बसपा को मिला लोगों का साथ 

यहां बड़ी बात यह है कि बसपा ने सपा और कांग्रेस से कहीं बेहतर प्रदर्शन इस बार निकाय चुनाव में किया है। पार्टी ने आगरा, झांसी, सहारनपुर, फिरोजाबाद सहित तमाम नगर निगम की सीटों पर बेहतर प्रदर्शन किया और जबरदस्त वोट हासिल किए। हालांकि बसपा बहुत अधिक सीटों पर जीत हासिल नहीं कर सकी है, लेकिन यह नतीजे इसलिए भी बसपा के लिए संजीवनी साबित हो सकते हैं क्योंकि पार्टी को एक बार फिर से दलित वोटों का साथ मिला है, इसके अलावा उसे मुस्लिम वोटर्स का भी सहयोग प्राप्त हुआ है | 

अलीगढ़ में बसपा ने भाजपा का 22 साल पुराना किला ढहा दिया तो मेरठ भी कब्जाया है. बसपा ने पश्चिम यूपी में दूसरा स्थान कायम रखा तो मध्य और पूर्व यूपी में मत प्रतिशत को बढ़ाकर पार्टी का वजूद मजबूत किया है. ऐसे में वर्ष 2019 के आम चुनावों में बसपा की अगुवाई में गहागठबंधन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है.

सोशल इंजीनियरिंग से बसपा नई ऊर्जा

तमाम बड़े नेताओं की बगावत से बेचैन बसपा ने निकाय चुनावों में बड़े चेहरों पर दांव लगाने के बजाय सोशल इंजीनियरिंग को चुना. इसी रणनीति के चलते पार्टी ने मिश्रित आबादी वाले अलीगढ़ में मुस्लिम चेहरे मो. फुरकान को मैदान में उतारा, जबकि जाट बिरादरी के किले मेरठ में सुनीता वर्मा के रूप में गैर जाट वोटों का ध्रुवीकरण करने का प्रयास किया. दोनों शहरों में बसपा की जीत का नतीजा सामने है. झांसी में बसपा ने ब्राह्मण चेहरे बृजेंद्र व्यास को टिकट देकर कांग्रेस और सपा का खेल बिगाड़ा, जबकि आखिरी राउंड तक भाजपा के रामतीर्थ सिंघल को परेशान किये रखा.

दूसरे बड़े शहरों में भी धमाकेदार आगाज

पिछले चुनावों की तुलना में बसपा ने वर्ष 2017 के निकाय चुनावों में बड़े शहरों में शानदार प्रदर्शन किया है. वर्ष 2012 के निकाय चुनावों में कानपुर में बसपा समर्थित प्रत्याशी को 20 हजार वोट भी नहीं मिले थे, जबकि इस मर्तबा पार्टी ने पचास हजार का आंकड़ा स्पर्श किया है. इसी प्रकार लखनऊ में बीते चुनावों में दयनीय प्रदर्शन करने वाली बसपा ने पचास हजार से ज्यादा वोट हासिल हुए हैं. पश्चिम यूपी में नगर निगम के अतिरिक्त नगर पालिका तथा नगर पंचायत के निकायों में भी बसपा को जबरदस्त जीत मिली है.


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