बुंदेलखंड के इस जिले में तीन दिन में एक बार मिलता है पानी

By: jhansitimes.com
Apr 18 2018 03:51 pm
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रिपोर्ट-सत्येंद्र सिंह परमार, टीकमगढ़। बुन्देलखण्ड क्षेत्र पानी का संकट गर्मी आते ही गहराने लगता है। उत्तर प्रदेश हो या फिर मध्य प्रदेश का क्षेत्र। वर्तमान सभी जगह पेयजल संकट बढ़ गया है। कुछ ऐसा ही हाल हो गया है मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के जनपद टीकमगढ़ में भी। जिले में गर्मी अभी अपने पूरे शबाब पर भी नही आयी है और इसके पहले ही हालत इतने भयावह हो गये है कि लोगों को पानी सहेजने के लिये तमाम प्रकार के जतन करना पड रहे है। यहां के हालात यह है कि लोगों को हर तीसरे दिन बमुश्किल पानी उपलब्ध हो पा रहा है। इसके अलावा नगर के कुछ मोहल्ले तो ऐसे हैं, जहां नल की पाइप लाइन न होने और हैण्डपंप सूख जाने के कारण वहां टेंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। जिससे पानी को लेकर आये दिन लोगों में मारामारी तक की नौबत तक आ जाती है।

वहीं नलों एवं टैंकरो से पानी सप्लाई किये जाने का कोई समय निश्चित न होने के कारण लोगों को पूरा दिन पानी के इंतजार में ही गुजराना पडता है। ऐसे में जहां गृहणियों का घर गृहस्थी का काम काज प्रभावित होता है, तो वहीं पुरूष भी काम और मजदूरी करने नही जा पाते है। वही इस मामले में नगर पालिका का कहना है कि हमारे पास पानी की कमी है। जितना है उसको हम एक रोस्टर के मुताबिक शहर में वितरित करा रहे हैं। 

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कभी-कभी नहीं आता टैंकर, खाली बर्तन आते है घर वापस

बुन्देलखण्ड के अति सूखाग्रस्त जिलों में शामिल टीकमगढ़ नगर में पानी के हालात इतने खराब हो चुके है, कि लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिये पानी को तीन दिन तक सहेज कर रखना पड़ता है। स्थानीय निवासी साधना खरे ने बताया कि तीसरे दिन नगर पालिका द्वारा नलों व टैंकरों से वितरित किये जाने वाले पानी के लिये महिलाओं और पुरूषों को अपने कामकाज छोड़ पूरे दिन पानी का इंतजार करना पडता है। इसके बाद भी कभी-कभी नलों की टोंटी और टैंकरों को देखते-देखते पूरा दिन गुजरने के बाद भी उनकी उम्मीदों पर पानी फिर जाता है। अगले दिन शिकायत करने पर भी कोई उनकी समस्या को सुनने को तैयार नही है। जबकि एक निश्चित समय में पर्याप्त पानी उपलब्ध होना चाहिये, जिससे घर का गुजारा चल सके।

टैंकरों पर कब्जा कर लेते हैं लोग

वहीं रामदेवी का कहना है कि पानी की कमी के चलते नगर पालिका द्वारा नगर में हर तीसरे दिन की जा रही पानी की सप्लाई के हालात यह है कि नल खुलने और पानी का टैंकर पहुंचने के अनुमानित समय के घंटो पूर्व से लोग अपने-अपने बर्तनों सहित घरों के दरवाजों व चिन्हित स्थानों पर लाइन लगाकर इंतजार करते रहते हैं। टैंकर के पहुंचने पर हालात यह बन जाते है कि लोग अपनी-अपनी पाईप लेकर टैंकरों को चारो ओर से घेरकर उसके उपर चढ़ जाते हैं। टैंकर को खाली होने में पांच मिनट का भी वक्त नहीं लगता। राकेश कुशवाहा बताते हैं कि ऐसे पानी वितरण में कई लोगों को पानी न मिलने के कारण अपने खाली बर्तन लेकर वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ता है। इन हालातों में लोगों को एक से दो किलोमीटर दूर नगर में लगे इक्का-दुक्का पानी देने वाले हैण्डपपों से पानी भरना पड़ता है। यहां भी उन्हें कई बार आपसी झगड़े का शिकार होना पडता है।

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रोस्टर के अनुसार बांटा जाता है पानी: नगर पालिका अध्यक्ष

नगर पालिका अध्यक्ष टीकमगढ़ लक्ष्मी राकेश गिरि बताती हैं कि सूखे के चलते करीब डेढ़ लाख की आबादी वाले टीकमगढ़ नगर में पानी की कमी है। फिर भी जितना पानी है उसे 9 जोन में बांटकर नगर के 27 वार्डों में एक निर्धारित रोस्टर के तहत तीन दिन में नलों के माध्यम से और जहां नलों की लाइनें नही हैं, वहां टैंकरों के माध्यम से पानी भेजा जा रहा है। दो माह की दिक्कत है बस। फिर सबकुछ ठीक हो जाएगा। 


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