पेशवा की छबीली ने जब अकेले ही अंग्रेज़ों के छुड़ा दिए थे छक्के, यहां जानिए-मणिकर्णिका के बारे में 1

By: jhansitimes.com
Oct 03 2018 04:24 pm
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कंगना रनौत (Kangana Ranaut) की फिल्म मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी (Manikarnika) का टीज़र आ चुका है. इस फिल्म में रोंगटे खड़े कर देने वाली परफॉर्मेंस के बाद अब लोगों में मणिकर्णिका को और जानने की इच्छा लोगों में बढ़ गई है. कि आखिर ये मणिकर्णिका कौन थी जिनका किरदार बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत निभा रही हैं? आखिर कौन थी महिला जिन्होंने अंग्रेज़ों और दुश्मनों को अकेले ही अपनी तलवार और बंदूक से रौंद डाला. यहां जानिए मणिकर्णिका के बारे वो 10 बातें, जिससे आपको इस 'रानी' को समझने में आसानी होगी.

1. मणिकर्णिका कोई और नहीं बल्कि बल्कि झांसी की रानी हैं. इनके बचपन का नाम मणिकर्णिका था और इन्हें प्यार से मनु और छबीली भी बुलाया जाता था. इनका जन्म 19 नवम्बर 1828 को हुआ.

2. मराठा ब्राह्मण परिवार से संबंधित मणिकर्णिका बचपन से ही शास्त्रों और शस्त ज्ञान की धनी थीं. इनके पिता मोरोपंत मराठा बाजीराव (द्वितीय) की सेवा करते थे और मां भागीरथीबाई बहुत बुद्धीमान और संस्कृत को जानने वाली थी. लेकिन मणिकर्णिका के जन्म के बाद 4 साल ही उन्हें मां का प्यार नहीं मिल पाया, 1832 में उनकी मृत्यु हो गई.

3. 1842 में 14 साल की उम्र में मणिकर्णिका का विवाह झांसी के राजा गंगाधर राव नेवालकर से हुआ. राजा गंगाधर राव झांसी के एक योग्य मराठा राजा थे. उनके कार्यकाल से पहले झांसी अंग्रेज़ों के कर्ज तले दबी हुई थी. लेकिन सत्ता में आने के बाद कुछ ही सालों में उन्होंने अंग्रेज़ों को बाहर कर दिया. इस वक्त में रानी मणिकर्णिका उनके साथ थी. इसी वजह से राजा गंगाधर मणिकर्णिका को शुभ मानते थे. इसी के चलते माता लक्ष्मी के नाम उन्हें नया नाम मिला रानी लक्ष्मीबाई. 

4. रानी लक्ष्मीबाई और राजा गंगाधर को शादी के 8 साल बाद 1851 एक पुत्र की प्राप्ति हुई, जो सिर्फ 4 महीने ही जीवित रह सका. इस बात से गंगाधर शोक में चले गए और बीमार रहने लगे. बीमारी को देखते हुई रानी लक्ष्मीबाई और राजा गंगाधर राव को पुत्र गोद लेने की सलाह दी गई. 

 ५. अपने बेटे की मृत्यु के 2 साल बाद 1853 राजा गंगाधर राव का भी निधन हो गया. इससे पहले गंगाधर राव ने एक पुत्र को गोद ले लिया था जिसका नाम रखा दामोदर राव. 

6. बेटे और खुद राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद रानी लक्ष्मीबाई भी कमज़ोर पड़ने लगीं और इस बात का फायदा अंग्रेज़ी सरकार और पड़ोसी राज्यों ने उठाया. इन सभी ने मिलकर झांसी पर आक्रमण शुरू कर दिया. 

 

७. 1857 तक झांसी में हिंसा सभी तरफ से घिर चुकी थी और फिर झांसी को दुश्मनों से बचाने का जिम्मा खुद रानी लक्ष्मीबाई ने अपने हाथों में लिया. उन्होंने अपनी महिला सेना तैयार की और इसका नाम दिया 'दुर्गा दल'. इस दुर्गा दल का प्रमुख उन्होंने अपनी हमशक्ल झलकारी बाई को बनाया.  

8. रानी लक्ष्मीबाई की हमशक्ल झलकारी बाई शत्रु सेना को धोखा देने का काम करती थीं. खास बात यह कि वो रानी लक्ष्मीबाई की ही तरह कपड़े और जेवर पहन मैदान में उतरा करती थीं. झलकारी बाई ने कई युद्ध लड़े लेकिन अंग्रेज़ों के हाथों पकड़ी गईं. इनकी वीरता को आज भी बुंदेलखंड में लोकगाथाओं और लोकगीतों के जरिए सुनाया जाता है. इतना ही नहीं भारत सरकार ने 22 जुलाई 2001 को झलकारी बाई के सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया.

९. 1858 में एक युद्ध के दौरान अंग्रेज़ी सेना ने पूरी झांसी को घेर लिया और पूरे शहर पर कब्ज़ा कर लिया. लेकिन रानी लक्ष्मीबाई भागने में सफल रहीं. वहां से निकलर को तात्या टोपे से मिलीं. 

10. रानी लक्ष्मीबाई ने तात्या टोपे के साथ मिलकर ग्वालियर के एक किले पर कब्ज़ा किया. लेकिन 18 जून 1858 को अंग्रेज़ों से लड़ते हुए 23 साल की उम्र में रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु हो गई.


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