कब आओगी दीदी, राह देख रही बुंदेलखंड की गंगा पहूज नदी... पढ़ लीजिये ये, खास खबर

By: jhansitimes.com
Jan 11 2018 10:23 am
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(न्यूज एडिटर, मदन यादव ) झाँसी। पुष्पवती कही जाने वाली बुंदेलखंड में झाँसी की पहूज नदी को वर्ष 2014 में केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद उमा भारती ने पूरे रीति-रिवाज के साथ गोद लिया था। उस समय बुंदेलखंड और विशेषकर झाँसीवासियों को लगा कि अब नदी की सफाई होगी और बुंदेलखंड की गंगा कही जाने वाली इस नदी के दिन बहुरेंगे। लेकिन उमा ने अपने स्वभाव को नहीं बदला और न ही बदली पहूज की तकदीर। नदी की दशा वर्ष 2014 से 2018 आते-आते और अधिक दुर्दशा में बदल गई। इस बुंदेलखंड की गंगा को नदी के रूप में देख चुके लोग अब अपने बच्चों को इसे गंदे नाले के रूप में दिखाने को मजबूर हैं। अब तो नदी भी खुद को गोद लेने वाली केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद उमा भारती की राह तक रही है कि कब वह आकर उसकी खैर-खबर लेंगी।

यूं ही नहीं कहा जाता इसे बुंदेलखंड की गंगा

महानगर के लिए अहम मानी जाने वाली इस नदी का विस्तार बहुत ज्यादा नहीं है। यह बैदोरा के जंगल से निकलकर महज 38 किलोमीटर का सफर तय करती है। यही कारण है कि नदी में पानी का जलस्तर बहुत ज्यादा नहीं रहता है, लेकिन बारिश में नदी उफना जाती है। बरसात के इस बहाव को रोकने का इंतजाम पहूज डैम के माध्यम से किया गया है। डैम के पानी का शुद्धिकरण करने के बाद महानगर में सप्लाई की जाती है। साथ ही इससे निकलने वाली नहर हजारों हेक्टेयर भूमि की सिंचाई भी करती है। बारिश थमने के बाद नदी का बहाव भी थम जाता है और यह नदी छोटे नाले का रुप ले लेती है। केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद उमा भारती को जल संसाधन एवं गंगा विकास मंत्री बनाया गया। मंत्री बनने के बाद झांसी आई केंद्रीय मंत्री ने पहूज नदी को गोद ले लिया। इससे लोगों में नदी की बदहाली समाप्त होने की उम्मीद जाग गई थी।

यह था उमा का प्रोजेक्ट

केंद्रीय मंत्री ने नदी को गोद लेने के बाद सिंचाई विभाग के माध्यम से 43 करोड़ रुपए का एक शानदार रोडमैप तैयार कराया और इस परियोजना को तकनीकी स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेज दिया। उमा के ड्रीम प्रोजेक्ट को आकार देते हुए बताया था कि योजना के तहत झाँसी के पास 128 मीटर की दूरी तक नदी के किनारे पर मिट्टी डालकर समतल किया जाएगा। इसके साथ ही किनारों पर फैली पड़ी गंदगी को साफ किया जाएगा। साथ ही ग्राम डोंगरी, गुढ़ा, डेली, कोट व लकारा के किनारे 5 घाट बनाए जाएंगे। यहां लोगों को स्नान आदि की व्यवस्था की जाएगी। सिंचाई विभाग ने प्रोजेक्ट लखनऊ भेज दिया, उसके बाद क्या हुआ, कोई नहीं जानता। 

नाले में बदल गई पहूज नदी

झाँसी जनपद मुख्यालय से निकलने वाली इस पहूज नदी को उमा भारती ने केंद्रीय मंत्री बनते ही गोद लेने की घोषणा कर दी थी। उन्होंने दावा किया था कि इस नदी को गंगा की तरह स्वच्छ और पवित्र कर पुराने हालत में ले आएंगे साथ ही इसका सौंदर्यीकरण भी कराया जाएगा। लगातार मंत्री रहते हुए और क्षेत्र की सांसद रहते ही भी उमा भारती कभी पलट कर नदी के किसी तट पर नहीं गई। अपनी घोषणा करने के बाद से ही उमा ने नदी की उपेक्षा की। 

तटों पर हुआ भू माफियाओं का कब्जा

अब हालात यह हैं कि यहां नाले में बदल चुकी इस बुंदेलखंडी गंगा के तट पर  भू-माफियाओं ने कब्जा कर लिया है और नदी किनारे प्लाटिंग कर दी गई। कुछ तो इससे भी आगे निकल गए और सिंचाई विभाग, जेडीए आदि विभागों से मिलीभगत कर यहां बड़ी-बड़ी कॉलोनियां विकसित कर दीं। यह कार्य लगातार और बदस्तूर जारी है। 

अवैध खनन जोरों पर, प्रशासन खानापूर्ति में जुटा

पहूज नदी केवल भू माफियाओं के निशाने पर ही नहीं है, इसका सबसे ज्यादा दोहन अवैध खनन करने वाले कर रहे हैं। प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टर व डंपर बालू इस नदी से निकाली जाती है। जिन ग्रामीणों के खेतों से यह नदी निकली है, वहां उन ग्रामीणों को चंद प्रतिशत का हिस्सेदार  बनाकर दबंग व राजनैतिक संरक्षण प्राप्त लोग जमकर अवैध खनन कर रहे हैं और मिट्टी को सोने के भाव बेच कर अपनी तिजोरियां भरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। 

गंदगी को भी बहाया जा रहा नदी में

पूरे शहर का कचरा एकत्र कर कभी-कभी नगर निगम भी उसे नदी में बहाने से गुरेज नहीं करता। इसके अलावा आसपास का कचरा व गंदगी नदी में बहा दी जाती है। इससे भी इस स्वच्छ निर्मल बुंदेलखंडी गंगा का स्वरूप बिगड़ गया और पूरी नदी एक गंदा नाला बनकर रह गई। इसको रोकने की पहल न तो नगर निगम कर रहा और समाज सेवी संस्थाएं। 

कब्जेदारों ने भी जमीनों पर हक जमाया

आसपास के लोगों ने भी पहूज नदी के डूब क्षेत्र में अपना जमीनी हक जमा लिया है। उन्हें रोकने की हिम्मत न तो प्रशासन कर पा रहा है और न ही पुलिस। कारण, उनको राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है। ऐसे में अधिकारी निरीक्षण को जाते हैं और अपनी मुंह की खा के लौट जाते हैं। नोटिस देकर अथवा महज औपचारिकता कर फाइलों में निरीक्षण दर्ज कर दिया जाता है।


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