मौत की गिनती गिन रही योगी सरकार, 60 बच्चों की सस्ती जान पर कौन देगा इन 10 सवालों का जवाब?

By: jhansitimes.com
Aug 13 2017 09:11 am
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गोरखपुर: कुछ दिनों बाद 70वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे भारत में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 5 दिनों के अंदर सरकारी हॉस्पिटल में हुई 60 से अधिक बच्चों की दर्दनाक मौत की खबर आते ही देश भर में हाहाकार मचा हुआ है| मामले ने तूल पकड़ लिया है|  गोरखपुर की घटना ने सरकार और प्रशासन के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर आजादी के 70 साल बाद भी इस देश में बच्चों की जान इतनी सस्ती है? बता दें कि गोरखपुर पिछले 20 सालों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चुनाव क्षेत्र है|   शर्मनाक हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत की खबरों से इनकार कर दिया| तो विपक्ष बयानबाजी से अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने में जुट गई है|  जबकि देश का आम नागरिक सरकार और सरकारी मशीनरी ये 10 सवाल पूछ रही है| 

1- दो दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज का दौरा किया था. इस दौरे के दौरान क्या सीएम योगी ये भी नहीं जान पाए कि किसी भी अस्पताल के लिए जरूरी ऑक्सीजन की सप्लाई में बाधा होने वाली है?

2- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के दौरान क्या अस्पताल प्रशासन ने सीएम को ऑक्सीजन के पैसे के बकाए के बारे में सूचना नहीं दी. अगर नहीं दी तो इस प्रशासनिक भूल के लिए हम बच्चों की जान गंवा देंगे?

3- मौजूद चिट्ठी में स्पष्ट पता चल रहा है कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी ने स्थानीय डीएम को सूचित किया था कि बकाया भुगतान नहीं हुआ तो वे कड़ा कदम उठाएंगे. इसके बाद भी डीएम ने इसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया?

4- क्या ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के लिए 63 लाख रुपए इतनी बड़ी रकम थी कि वह सप्लाई बंद करने जैसा फैसला ले लिया?

5- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑक्सीजन सप्लाई में पांच दिनों से दिक्कतें आ रहीं थीं. अगर ये भी छोड़ दें तो 30 बच्चों की मौत 36 घंटों के दौरान हुई. अस्पताल में दो-तीन बच्चों की मौत के बाद भी अगर प्रशासन ने ऑक्सीजन की व्यवस्था करने में देरी की तो इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए. क्या सरकारी मशीनरी के पास इतने भी इंतजाम नहीं थे कि वह दो-तीन घंटे के भीतर ऑक्सीजन की सप्लाई बहाल कर सके?

6- अक्सर महानगरों में डेंगू, स्वाइन फ्लू के दो-तीन मामले सामने आने के साथ ही पूरा सरकारी अमला और केंद्र सरकार युद्ध स्तर पर इससे निपटने में जुट जाते हैं. वहीं उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, बिहार के मुजफ्फरपुर, छत्तीसगढ़ के बस्तर में हर साल खतरनाक बुखार से बच्चों की मौत होती हैं, फिर भी इसे रोकने के लिए खास इंतजाम नहीं किए जाते हैं. तो क्या हम मान लें कि देश की सरकारी मशीनरी केवल महानगरो में रहने वालों के लिए होती हैं?

7- मुख्यमंत्री के गृह जिले के सबसे बड़े अस्पताल में प्रशासन इस तरह की लापरवाही कर रही है तो राज्य के दूसरे जिलों की क्या हाल होंगे?

8- यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान योगी आदित्यनाथ ने अपने कई भाषणों में दावा किया था कि सत्ता में आते ही जापानी बुखार को लेकर कदम उठाएंगे. इस बार बरसात का सीजन शुरू होने से पहले सरकार ने एहतियातन कोई बड़ा कदम क्यों नहीं उठाया?

9- अखिलेश यादव, मायावती, गुलाम नबी आजाद जैसे विपक्षी नेताओं ने एक सुर में इस घटना के लिए योगी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. बड़ा सवाल यह है कि जापानी बुखार की समस्या गोरखपुर में लंबे समय से है. ऐसे में पूर्ववर्ती सरकारों ने इससे निपटने के लिए कोई इंतजाम क्यों नहीं किया?

10- 2014 के लोकसभा और 2017 के यूपी विधानसभा चुनावों में पीएम नरेंद्र मोदी ने पूर्वांचल की जनसभाओं में कहा था कि दोनों जगह बीजेपी की सरकार बनने के बाद जापानी बुखार की बीमारी से निजात दिलाने में आसानी होगी. पीएम मोदी के वादों का क्या हुआ?

आइए जानें इस मामले में अब तक क्या हुआ... 

- उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि सभी मौतें ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से नहीं हुई हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति प्रकरण की जांच करेगी और किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. योगी ने कहा कि तथ्य को मीडिया सही तरीके से पेश करे. सीएम योगी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में हादसे से ज्यादा अपने कार्यों पर जोर दिया. उन्होंने अस्पताल के दौरे के अलावा पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य इंतजाम पर सफाई दी.

- गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल डॉक्टर राजीव मिश्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने प्रिंसिपल के इस्तीफे की खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है लेकिन हम उन्हें पहले ही निलंबित कर चुके हैं और उनके खिलाफ जांच भी शुरू की गयी है.

-इलाहाबाद में एक सभा में भी योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि उनके गृह नगर में बच्चों की मौत गंदगी भरे वातावरण और खुले में शौच के चलते हुई है. आदित्यनाथ ने कहा, "मच्छरों से फैलने वाली कई बीमारियां हैं, जिसमें इनसेफलाइटिस भी शामिल है.

- मौजूद चिट्ठी में स्पष्ट पता चल रहा है कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी ने स्थानीय डीएम को सूचित किया था कि बकाया भुगतान नहीं हुआ तो वे कड़ा कदम उठाएंगे. एक चिट्ठी में कहा गया कि सिलिंडर की सप्लाई नहीं कर पाएंगे क्योंकि 63 लाख रुपये से ज़्यादा का बकाया हो गया है. दूसरी चिट्ठी 10 अगस्त की है जो ऑक्सीजन सिलिंडर सप्लाई करने वाली कंपनी के कर्मचारियों ने लिखी थी.

- मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इस अस्पताल में बच्चों की मौत का सिलसिला 7 अगस्त को ही शुरू हो गया था. 9 तारीख की आधी रात से लेकर 10 तारीख की आधी रात को 23 मौतें हुईं जिनमें से 14 मौतें नियो नेटल वॉर्ड यानी नवजात शिशुओं को रखने के वॉर्ड में हुई जिसमें प्रीमैच्योर बेबीज़ रखे जाते हैं. 

- शनिवार को अस्‍पताल में ऑक्‍सीजन सिलिंडर सप्‍लाई करने वाली कंपनी पुष्‍पा सेल्‍स के मालिक मनीष भंडारी के घर पर छापा मारा गया था. विपक्ष ने सीएम से इस्तीफा मांगा और कांग्रेस के नेताओं का दल मौके पर पहुंचा हालांकि कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री खुद मौके पर नहीं पहुंचे इसका लोगों में अच्छा खासा रोष है.


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