...तो 40 से 60 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा भाजपा का वोट प्रतिशत, जुटी भगवा टोली

By: jhansitimes.com
Aug 01 2017 12:25 pm
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2019 की लड़ाई में किलेबंदी को और मजबूत बनाने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का यादव-जाटव और अन्य छोटी, पिछड़ी व दलित जातियों को जोड़ने का अभियान शुरू हो गया है | वह लोकसभा चुनाव में भाजपा का मत प्रतिशत 40 से बढ़ाकर 60 तक पहुंचाने का सियासी गणित का तैयार कर रहे हैं |  भगवा टोली तरह-तरह के प्रयोग और अभियान से प्रदेश की चुनावी लड़ाई को 80 बनाम 20 बनाने में जुटी  है। 

जातियों की मजबूत गोलबंदी से भारतीय जनता पार्टी विरोधियों को पस्त करके, खासतौर से यादव व जाटव की ताकत पर खड़ी सपा व बसपा की बुनियाद कमजोर करना चाहती है ताकि 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा की सफलता की संभावनाएं 2014 व 2017 के मुकाबले ज्यादा मजबूत और आसान हो जाएं।

लोकसभा चुनाव में गैर यादव पिछड़े और गैर जाटव दलित वोटों के साथ अगड़ों की गोलबंदी से जीत हासिल करने वाली भाजपा को विधानसभा चुनाव में मुलायम परिवार में बिखराव के चलते सपा के वोट भाजपा के पाले में आते दिखे और मायावती के मुस्लिम एजेंडे को धार देने की प्रतिक्रिया स्वरूप गैर जाटव दलित के साथ कुछ जाटव बिरादरी के वोट भी मिले।

विधानसभा की सुरक्षित 86 सीटों में 76 पर भी मिली सफलता 

भाजपा ने यादव बहुल कुछ सीटें तो जीती ही, साथ ही विधानसभा की सुरक्षित 86 सीटों में 76 पर भी विजय मिली। दीनानाथ भास्कर सहित जाटव बिरादरी के सात उम्मीदवार जीते तो रणनीतिकारों का उत्साह बढ़ गया। उन्हें लगा कि इस स्थिति का लाभ उठाकर सियासी समीकरणों को दुरुस्त किया जा सकता है।

 अनुकूल परिस्थितियों का लाभ

सपा के दो व बसपा के एक एमएलसी का त्यागपत्र देकर भाजपा में शामिल होना, सपा संरक्षक मुलायम सिंह और उनके अनुज शिवपाल का राष्ट्रपति चुनाव में राजग उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को मत देना, ये घटनाएं भाजपा को मजबूत करने का संकेत देती हैं। भगवा टोली को लगा कि इन संयोगों को सियासी समीकरण में बदलने का यही सही वक्त है। उसी रणनीति पर उसने काम शुरू किया है। लोकसभा या विधानसभा चुनाव में मोदी और शाह ने मंदिर का नाम भले नहीं लिया लेकिन हिंदुत्व के रंग से वोटों के गणित को अनुकूल बनाने की कोई कोशिश नहीं छोड़ी।

शाह ने लखनऊ प्रवास में जिस तरह कहा कि भाजपा सरकारें विकास सबका करेंगी लेकिन तुष्टीकरण किसी का नहीं, अयोध्या में मंदिर निर्माण सुलह-समझौते से होगा अथवा कानूनी तरीके से, इससे समझा जा सकता है कि यादव व जाटव को जोड़ने का अभियान भी चुनावी लड़ाई को 80 बनाम 20 बनाने के लिए भाजपा का मत प्रतिशत बढ़ाने का हिस्सा ही है।

विपक्ष से कम है भाजपा का वोट प्रतिशत

भाजपा को लोकसभा चुनाव में लगभग 42 और विधानसभा चुनाव में 40 प्रतिशत वोट मिला। पर, विरोधियों के वोट जोड़ दें तो भाजपा का वोट उनसे 10 प्रतिशत कम है। भाजपा के रणनीतिकारों को पता है कि 2019 के चुनाव में केंद्र और प्रदेश सरकार के काम भी कसौटी पर होंगे। सत्ता में होने के नाते कुछ असंतुष्ट तबकों का असंतोष भी चुनौतियां बढ़ाएगा।

संभवत: इसीलिए भाजपा के रणनीतिकार प्रदेश में मिशन 2019 के तहत पार्टी का मत 60 प्रतिशत पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। पिछड़ों में यादव और दलितों में जाटव वोट ही मुख्य रूप से मुलायम और मायावती के चलते अब तक भाजपा की पकड़ में नहीं हैं। पर, जिस तरह यादव परिवार में बिखराव हुआ है और मुलायम व शिवपाल मोदी और योगी सरकार की तारीफ कर रहे हैं और बसपा भी लगातार कमजोर हो रही है, उसके चलते ये तबके भाजपा से जुड़ सकते हैं।

अगर 54 प्रतिशत पिछड़ी आबादी में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले यादव और दलितों की 24 प्रतिशत आबादी में 55 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले जाटव भाजपा से जुड़ जाएं तो भाजपा के लिए मत प्रतिशत 40 से 60 पहुंचाना आसान हो जाएगा।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का लखनऊ में यादव और जाटव के साथ पिछड़े व दलित तबके की राजनीतिक रूप से उपेक्षित अन्य छोटी जातियों को जोड़ने पर जोर इसी लक्ष्य का हिस्सा नजर आता है।

उधर, बिहार घटनाक्रम के बाद शरद यादव जैसे यादव चेहरे और शिवपाल की जद (यू) से नजदीकी की खबरों के चलते उनके भाजपा के पक्ष में खड़े होने की संभावना बन रही है, उससे भीर भाजपा के रणनीतिकार उत्साहित हैं। इनका मानना है कि वे सियासी गणित दुरुस्त कर मत प्रतिशत को 60 प्रतिशत तक पहुंचाने में सफल होंगे।

 


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