रक्तदान करने में महिलाओं की भागीदारी कम...

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Jun 13 2018 08:12 pm
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झांसी। कहते हैं कि रक्तदान महादान होता हैं और मानव रक्त का  कोई विकल्प नहीं हैं क्योंकि रक्त को बनाया नही जा सकता ये स्वेच्छिक रक्तदान से ही मिल सकता हैं। 

रक्तदान के बारें में मेडिकल के पेथोलोजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ॰ मयंक सिंह बताते हैं कि पिछले पाँच सालों में कैम्पो के जरिये लोगों के व्यवहार में बदलाव आया है। अब काफी लोग रक्तदान करने के लिए आगे आते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सामाजिक रूढ़िवादिताओं में फसे हुये हैं। उन्हे लगता है कि रक्तदान करने से कमजोरी हो जाएगी या वह काम नहीं कर पाएंगे, जबकि रक्तदान करने से रक्त फिर से रीसाइकल होता हैं और ताजा खून बनता हैं। 

जिला अस्पताल ब्लड बैंक के इंचार्ज डॉ॰ एम॰एस॰ राजपूत बताते हैं कि अभी सिर्फ खून के बदले खून ही नहीं बल्कि में खून में पाये जाने वाले कॉम्पोनेंट के आधार पर खून को विभाजित भी किया जाता हैं। रक्त से चार अवयव/कंपोनेंट यानि कि लाल रक्त कोशिकाएं, प्लाज्मा, प्लेटलेटस और क्रायोप्रेसीपिटेट बनता है। ऐसे में आपके एक यूनिट रक्त से सैकड़ों मरीजों में जिस मरीज को जिस कंपोनेंट की आवश्यकता होती है उसे दिया जा सकता है।  हर महीने 150-200 रक्त यूनिट इकट्ठा की जाती हैं और इतना ही आपूर्ति में चला जाता हैं। जननी सुरक्षा योजना के तहत लाभार्थी को या कैंसर के मरीजों को निशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाता हैं।

जिला अस्पताल में वर्ष के अनुसार रक्तदाता

वर्ष 2013------ 890

वर्ष 2014------ 1185

वर्ष 2015------ 1262

वर्ष 2016------ 1450

वर्ष 2017------ 1580

आंकड़ों से पता चलता हैं कि पिछले 5 सालों में रक्तदाताओं की संख्या में इजाफ़ा  हुआ  हैं। लेकिन रक्तदान के लिए अभी भी पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की भागीदारी कम हैं जैसे कि पिछले वर्ष 1580 लोगों ने रक्तदान किया। जिसमें मात्र 40 महिलाएं थी। रक्तदान के प्रति महिलाओं के रूझान कम होने के कई कारण हैं। महिलाएं मां बनने से पहले और कुछ वर्ष बाद तक सिर्फ इसलिए रक्तदान नहीं कर पाती हैं क्योंकि अधिकांश का मानना हैं कि रक्तदान करने से बच्चे की परवरिश में कमी आ जाएगी। इस दौरान अधिकांश महिलाओं में खून की कमी या फिर अन्य कई तरह की समस्याएं रहती हैं। साथ ही जो इच्छुक होती हैं उनमें खुद खून की कमी होती हैं। वर्तमान में लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं खुद खून की कमी से ग्रसित हैं।

यह भी जानें

1- रक्तदान 18 वर्ष से 65 वर्ष का कोई भी स्वस्थ्य व्यक्ति कर सकता है।

2- रक्तदान के दौरान सामान्यतः 350 मिली लीटर लिया जाता है।

3- रक्तदान में करीब 10 मिनट का समय लगता है और हर तीन माह में रक्तदान किया जा सकता है।

4- रक्तदान से शरीर में किसी प्रकार की कमजोरी नहीं आती है। 

5- रक्तदाता का हीमोग्लोबिन 12॰5 ग्राम प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए।

6- रक्तदाता का वजन कम से कम 50 किलोग्राम होना चाहिए। 

7- रक्त चार प्रकार का होता है। ए, बी, ओ और एबी। इसे आरएच पॉज़िटिव और आरएच निगेटिव में बांट दिया जाता है।

रक्तदान के लाभ

1-- रक्तदान के तुरन्त बाद ही नई लाल कोशिकाएं बनने से शरीर में स्फूर्ति पैदा होती है।

2-- रक्तदान करते रहने से दिल की बीमारी में पांच प्रतिशत कमी आती है। साथ ही अस्थिमज्जा लगातार क्रियाशील रहती है।

3- रक्त द्वारा संक्रमित होने वाली बीमारियां की नैट विधि द्वारा स्वतः जांच हो जाती है।

4-  आवश्यकता पड़ने पर रक्तदाता कार्ड के बदले रक्तकोष से रक्त मिल जाता है।


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