ये 8 मुद्दे कर योगी सरकार की छवि को धूमिल, 2019 में बीजेपी कैसे बचाएगी अपना गढ़

By: jhansitimes.com
Apr 17 2018 01:04 pm
193

उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव|  2014 में 71 सीटें जीतने वाली बीजेपी को इन सीटों को बचाना है. इसका सारा दारोमदार सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ के कंधों पर है. लेकिन सपा और बसपा के साथ चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद अब राज्य का सियासी अंकगणित बीजेपी के साथ जाता नहीं दिखाई दे रहा है. इसका नतीजा हम हाल ही में हुए उपचुनाव में देख चुके हैं. इसी बीच कई ऐसे मामले में सामने आए हैं जिनसे योगी सरकार की छवि पर गहरा असर पड़ा है.

1- उन्नाव रेप कांड में उठे सवाल

उन्नाव रेप कांड का मामला सामने आने के बाद जिस तरह से आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को खुलेआम घूम रहे और पूरा प्रशासन उनके आगे नतमस्तक पड़ा रहा उससे कई सीएम योगी की मजबूत छवि पर सवाल उठे हैं. लोगों के बीच संदेश दिया गया कि सरकार खुद ही विधायक को बचाने में लगी रही है. पीड़िता की ओर से की गई मुख्यमंत्री से शिकायत भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. लेकिन जब दबाव बढ़ा तो सीबीआई जांच की सिफारिश की गई लेकिन इसी बीच हाईकोर्ट ने भी राज्य में कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठा दिए. विधायक इस समय जेल में हैं और सीबीआई जांच जारी है. लेकिन यह काम काफी पहले हो जाना चाहिए था.

2-गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव

इन दोनों चुनाव में हार योगी सरकार के लिए बड़ा झटका था. बीजेपी योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में ही चुनाव हार गई. फूलपुर की सीट डिप्टी सीएम केशव मौर्य की थी. वहां भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ गया.

3 -कानून व्यवस्था पर सवाल

योगी सरकार के आने के बाद से एनकाउंटर तो खूब हुए लेकिन इन एनकाउंटरों पर सवाल भी उठने लगे हैं. कई जगहों पर पुलिस और अपराधियों की सांठगांठ की भी बात सामने आई है. जिससे पता चलता है कि जिन अपराधियों ने मामला मैनेज कर लिया है वह कानून की पहुंच से दूर हैं. झांसी से भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमें पुलिस इंस्पेक्टर एक कुख्यात अपराधी से मिलकर मामला मैनेज करने की बात कह रहा है.

4 -नौकरियों पर संकट

शिक्षा मित्रों और बीटीसी प्रशिक्षितों का मामला सुलझ नहीं रहा है. ज्यादातर नौकरियों के कोर्ट में फंसे हुए हैं और अभ्यर्थी सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. 

5 -दलित सांसदों और नेताओं को नाराजगी

भारत बंद के बाद हुई हिंसा के बाद हुई कार्रवाई से 2 दलित सांसदों ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिख योगी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं. वहीं योगी सरकार की कैबिनेट में शामिल भारतीय सुहैलदेव पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर तो पूरी तरह से मोर्चा खोलकर बैठे हुए हैं.

6-बर्बाद हो रही हैं फसलें

चुनाव से पहले किसानों के मुद्दे को जोरशोर से उठाने वाली योगी सरकार से किसान बेहद परेशान हैं. वितरण केंद्रों में  एक ओर तो उनको खाद समय नहीं मिल रही है दूसरी ओर बूचड़खाने बंद होने से बैल और सांढ़ किसानों के खेतों में घुसकर फसल को बर्बाद कर रहे हैं. गोहत्या रोकने को लेकर सरकार की कोई साफ नीति नहीं है. इसका असर पशु क्रय-विक्रय पर भी पड़ा है. किसानों ने गोवंश जैसे बैल और सांढों को घर में पालकर खिलाने के बजाए खुला छोड़ दिया है जिनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है. ये गांवों में एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है. 

7 -ठाकुरवादी छवि

योगी सरकार की छवि ठाकुरवादी बन गई है. प्रदेश के महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों से लेकर थानों तक में क्षत्रिय जाति के अधिकारियों का बोलबाला है. इसको योगी आदित्यनाथ की जाति (उनका नाम आदित्य सिंह बिष्ट है ) से भी जोड़कर देखा जा रहा है. यूपी के उलझे हुए जातिगत समीकरणों के बीच सरकार की ऐसी छवि किसी भी लिहाज से सही नहीं है.  

8 -भ्रष्टाचार नहीं हुआ कम

योगी सरकार आने के बाद भी थानें और सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार थमा नहीं है. रिश्वत का खेल वैसे ही जारी है और सरकार के आदेशों का कोई असर जमीन स्तर पर नहीं दिख रहा है. हालांकि अभी तक कोई बड़ा भ्रष्टाचार का सामने नहीं आया है जिसमें सरकार से जुड़े किसी शख्स पर आरोप लगा हो लेकिन आम जनता को अभी तक सरकारी बाबुओं के भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ रहा है. 


comments

Create Account



Log In Your Account



छोटी सी बात “झाँसी टाइम्स ” के बारे में!

झाँसी टाइम्स हिंदी में कार्यरत एक विश्व स्तरीय न्यूज़ पोर्टल है। इसे पढ़ने के लिए आप http://www.jhansitimes .com पर लॉग इन कर सकते हैं। यह पोर्टल दिसम्बर 2014 से वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई की नगरी झाँसी (उत्तर प्रदेश )आरंभ किया गया है । हम अपने पाठकों के सहयोग और प्रेम के बलबूते “ख़बर हर कीमत पर पूरी सच्चाई और निडरता के साथ” यही हमारी नीति, ध्येय और उद्देश्य है। अपने सहयोगियों की मदद से जनहित के अनेक साहसिक खुलासे ‘झाँसी टाइम्स ’ करेगा । बिना किसी भेदभाव और दुराग्रह से मुक्त होकर पोर्टल ने पाठकों में अपनी एक अलग विश्वसनीयता कायम की है।

झाँसी टाइम्स में ख़बर का अर्थ किसी तरह की सनसनी फैलाना नहीं है। हम ख़बर को ‘गति’ से पाठकों तक पहुंचाना तो चाहते हैं पर केवल ‘कवरेज’ तक सीमित नहीं रहना चाहते। यही कारण है कि पाठकों को झाँसी टाइम्स की खबरों में पड़ताल के बाद सामने आया सत्य पढ़ने को मिलता है। हम जानते हैं कि ख़बर का सीधा असर व्यक्ति और समाज पर होता है। अतः हमारी ख़बर फिर चाहे वह स्थानीय महत्व की हो या राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय महत्व की, प्रामाणिकता और विश्लेषण के बाद ही ऑनलाइन प्रकाशित होती है।

अपनी विशेषताओं और विश्वसनीयताओं की वजह से ‘झाँसी टाइम्स ’ लोगों के बीच एक अलग पहचान बना चुका है। आप सबके सहयोग से आगे इसमें इसी तरह वृद्धि होती रहेगी, इसका पूरा विश्वास भी है। ‘झाँसी टाइम्स ‘ के पास समर्पित और अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ संवाददाताओं, समालोचकों एवं सलाहकारों का एक समूह उपलब्ध है। विनोद कुमार गौतम , झाँसी टाइम्स , के प्रबंध संपादक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। जो पूरी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता का पिछले लगभग 16 वर्षों का अनुभव है। के पी सिंह, झाँसी टाइम्स के प्रधान संपादक हैं।

विश्वास है कि वरिष्ठ सलाहकारों और युवा संवाददाताओं के सहयोग से ‘झाँसी टाइम्स ‘ जो एक हिंदी वायर न्यूज़ सर्विस है वेब मीडिया के साथ-साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना विशिष्ट स्थान बनाने में कामयाब रहेगा।