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बुन्देलखंड

सर्दियों में शिशुओं को रहती है अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता

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(रिपोर्ट-सैय्यद तामीर उद्दीन) महोबा। सर्दी के मौसम में शिशु को पड़ती है अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत डॉ पी के सिंह राजपूत प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बेलाताल ने बताया कि हर माता-पिता अपने शिशु के स्वास्थ्य को लेकर खासा चिंतित भी रहते हैं। नवजात शिशु को लेकर यह चिंता तब और भी ज्यादा हो जाती है जब सर्दियों का मौसम आता है।
इस मौसम में शिशु अधिक बीमार पड़ते हैं। सर्दी के मौसम में शिशु को अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत पड़ती है। आमतौर पर मां अपने शिशु को सर्दी से बचाए रखने के लिए उसकी छाती को दो-तीन भारी ऊनी कपड़ों से ढंक देती है, लेकिन उसके पैरों व सिर को ठीक प्रकार से नहीं ढंकती। जिससे बच्चे को ठंड लगने का खतरा बना रहता है। अधिकांश लोगों में यह भ्रम होता है कि शिशु को ठंड छाती के जरिये जल्दी लगती है। जबकि सत्य तो यह है कि पैरों व सिर से सर्दी लगने का खतरा ज्यादा होता है। यही नहीं शिशु की छाती को ज्यादा ढंककर रखना उसके लिए नुकसानदेह हो सकता है।

शिशु के शरीर के नीचे का हिस्सा तापमान के प्रति थोड़ा अधिक संवेदनशील होता है। तापमान में अकस्मात परिवर्तन शिशु को बीमार करने का प्रमुख कारण होता है। शिशु के पेट से नीचे का भाग अधिक संवेदनशील होता है, इसलिए हमेशा शिशु के पैरों को ढंक कर रखना चाहिए। छाती को उतना ही ढंकना चाहिए जितनी जरूरत हो। शिशु का सिर जरूर ढंककर रखना चाहिए। ठंड में बच्चे को नहलाना जरूरी नहीं। उसकी साफ-सफाई के लिए किसी साफ कपड़े को गर्म पानी में भिगो कर उसे पोछ देना चाहिए। बच्चा जितना आराम करना चाहे उसे आराम करने देना चाहिए और बच्चे को नींद से नहीं जगाना चाहिए। बच्चे को समय-समय पर मां का दूध दें क्योंकि मां का दूध शिशु की आहार पूर्ति करता है।

सर्दियों में बच्चे को कम से कम घर से बाहर ले जाने का प्रयास करना चाहिए और कमरे में हीटर को बहुत तेज नहीं चलाना चाहिए। सर्दियों में संक्रमण अधिक होता है। कोई भी व्यक्ति जिसे सर्दी-जुकाम या कोई संक्रामक बीमारी है, उसे बच्चे से या मां से दूर रखना चाहिए। अगर बच्चे को डायरिया या हाइपोथर्मिया की समस्या लगती है तो तुरंत चिकित्सक से दिखाना चाहिए। शिशु की नैपी समय-समय पर बदलते रहें क्योंकि गीलेपन से संक्रमण फैल सकता है। बच्चे को रोज 15 से 20 मिनट तक सुबह की धूप लगाना चाहिए।

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