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बुन्देलखंड

कानून रहे तो समाप्त हो जायेगा खेती, किसानी का भविष्य: भाकियू

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(रिपोर्ट-सैय्यद तामीर उद्दीन) महोबा। तीनों कृषि कानून किसान विरोधी है और किसान इन्हें इसी रूप में देख रहा है, यदि इन्हें वापस नही लिया गया तो खेती और किसानी का भविष्य समाप्त हो जायेगा, अपनी इन्हीं मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन और अनेक किसान संगठन दिल्ली के आस-पास पिछले तकरीबन 55 दिनों से आन्दोलनरत है लेकिन अंधेर की बात यह है कि सरकार का रवैया कानून वापसी को लेकर अडियल है।
भारतीय किसान यूनियन ने किसान दिवस के मौके पर इन कानून को वापस लिये जाने की केन्द्र सरकार से पुरजोर मांग की है और  इस आशय का एक मांग पत्र प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से प्रधानमन्त्री को भेजा है।
भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि भारत सरकार द्वारा लाये गये तीनों कृषि कानून खेती, किसानी के हक में बिल्कुल नही है इससे खेती और किसानी पर बुरा असर पड़ेगा, स्थिति यह बनेगी कि  आने वाले दिनों में खेती किसानी का भविष्य ही समाप्त हो जायेगा। किसान और उसके हक में काम करने वाले संगठन खेती किसानी को बचाने को लेकर लगातार कड़कड़ाती सर्दी के बीच दिल्ली के नजदीक आन्दोलन कर रहे है, अब तक कई दौर  की सरकार से बातचीत हो चुकी है परन्तु नतीजा अभी तक तो कुछ नही निकला है, सरकार का कानून वापस लेने के मामले में रवैया अडियल है। जबकि किसान और उसके हित में काम करने वाले संगठन कानून वापस लिये जाने की मांग कर रहे है और यही उनकी मांग है, भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि सरकार को कानून वापस लेना पड़ेंगे, अन्यथा भारतीय किसान यूनियन का आन्दोलन खत्म होने वाला नही है। इस मौके पर यूनियन के जिलाध्यक्ष राम खिलावन शुक्ला, जिला महामन्त्री दीपक तिवारी, ओम प्रकाश रावत, सुभाष चौरसिया, इशहाक खां, अंजु भारती, बृजेन्द्र कुमार सोनकिया, गयादीन आदि मौजूद रहे।

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