उमा भारती ने शुरू की गंगा पैदल यात्रा, अब तक पूरा किया 60 किमी का सफर

नई दिल्ली: इन दिनों झांसी -ललितपुर की पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती पैदल गंगा यात्रा पर हैं. इस यात्रा की शुरुआत उमा भारती ने गंगोत्री से की थी. अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए वह अपनी यात्रा की जानकारी लोगों के साथ साझा करते हुए उमा भारती ने सोमवार को कई ट्वीट किए, जिनमें उन्होंने यात्रा के दौरान अपने अनुभवों के बारे में बताया. उमा भारती ने ट्वीट किया कि 19 अक्टूबर को मैंने गंगोत्री से अपने गंगा प्रवास शुरू करने की सूचना दी थी. उसके बाद मैं दो दिन तक घाटी में थी. घाटी गहरी होने के कारण मोबाइल के सिग्नल नहीं मिल रहे थे. उन्होंने लिखा कि भोपाल ऑफिस के जरिए जानकारी मिली है कि कुछ लोग मेरे साथ गंगा प्रवास पर रहने के लिए आना चाहते हैं, साथ ही कुछ लोगों ने मेरे प्रवास की व्यवस्थाओं की चिंता व्यक्त की है. सोशल मीडिया के माध्यम से उमा भारती ने सभी सवालों के जवाब दिए.
उमा भारती ने बताया कि गंगोत्री से लगभग भटवारी तक कोई भी गांव रोड पर नहीं है सिर्फ छोटे-छोटे ढाबे हैं, जहां सीमित मात्रा में चाय या भोजन मिल सकता है. मैं परसों राणा जी नाम के एक किसान की झोपड़ी में रही जो उन्होंने सेब के बगीचे में रखवाली के लिए बनाई हुई है. उन्होंने बताया कि दोनों पति-पत्नी ने पुष्प वर्षा करके मेरा स्वागत किया और गोबर से लिपी-पुती हुई झोपड़ी में हल्की सी आग जलाकर रोशनी का इंतजाम किया. मुझे ऐसा लगा जैसे उन्होंने मुझे स्वर्ग में रखा है. बीजेपी नेत्री के मुताबिक मेरे साथ करीब 10 लोग जिसमें मेरे सुरक्षाकर्मी, मेरे निजी सहयोगी तथा डोली वाले शामिल हैं. उन्होंने बताया कि अभी तक हमें इतनी लोगों की व्यवस्था करने में भी मुश्किल हो रही है. मैंने अभी तक लगभग 60 किलोमीटर की दूरी तय की है, जिसमें से 10 किलोमीटर की दूरी डोली में बैठकर करना पड़ा है. उन्होंने बताया कि 1996 की दुर्घटना में मेरे दोनों घुटनों को काफी नुकसान पहुंचा था, जो अब तक ठीक नहीं हो पाया है.
उमा भारती ने बताया कि मैं सपाट और उतार वाली सड़क पर पैदल चलती हूं फिर जैसे ही चढ़ाई की सड़क आती है मैं डोली में बैठ जाती हूं. इस दौरान मैं गाड़ी का इस्तेमाल नहीं कर रही हूं. गंगा के किनारे अकेले बहुत आनंद में चलती आती हूं. उमा भारती के मुताबिक जो लोग मेरे साथ प्रवास में शामिल होना चाहते हैं उन्हें उत्तरकाशी के बाद भैया दूज के बाद मेरे ऑफिस के लोग सूचना देंगे क्योंकि उत्तरकाशी से देव प्रयाग तक भी रुकने की व्यवस्थाओं में भारी अड़चन होगी. इसलिए सबको मेरे देवप्रयाग पहुंचने का इंतजार करना होगा. पूर्व केंद्रीय मंत्री के मुताबिक यह मेरे जिंदगी के सबसे खुशनुमा दिन है मुझे आप सबका आशीर्वाद और सहयोग चाहिए. मैं ट्विटर के माध्यम से आपसे संपर्क बनाए रखूंगी. उन्होंने कहा कि मैं जहां भी पहुंच जाती हूं वहीं पर रात में आसपास के ढाबे वाले या सेब की खेती करने वाले किसान मुझे खूब प्रेम से भोजन कराते हैं और रखते हैं.

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