आज़मगढ़ :तरवाँ थाना क्षेत्र में डॉक्टर की लापरवाही से महिला की हुई मौत, परिवार ने लगाया न्याय कि गोहार

आजमगढ़:  मामला तरवा थाना क्षेत्र के गतवा ग्राम का है जहां डॉक्टर की लापरवाही से एक महिला की मौत हो गई मिली जानकारी के अनुसार तरवा थाना क्षेत्र के गतवा ग्राम की निवासी
मनसा देवी पत्नी नंदलाल उम्र करीब 32 वर्ष की डिलीवरी परमानपुर सरकारी अस्पताल में हुई जहां उसने एक बच्चे को जन्म दिया। जहां जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ थे लेकिन अचानक मनसा देवी की ब्लीडिंग शुरू हो गई और खून की काफी कमी हो गई और डॉक्टर ने खून चढ़ाने की बात की और आजमगढ़ रेफर कर दिया लेकिन परिजनों ने मरीज को लेकर खरिहानी बाजार के पश्चिम दिशा में मेहनगर रोड पर स्थित अथर्व नर्सिंग होम में मशादेवी को भर्ती कराया जहां के डॉक्टर महेंद्र चौहान ने खून चढ़ाया और एकाएक मनसा देवी की तबीयत बिगड़ने लगी और आनन-फानन में डॉक्टर महेंद्र चौहान ने अपने निजी वाहन से रमा हॉस्पिटल आजमगढ़ भिजवा दिया जहां पर डॉक्टरों ने मनसा देवी को मृत घोषित कर दिया परिजनों का आरोप है कि मनसा देवी की मृत्यु अथर्व नर्सिंग होम खरिहानी में पहले ही हो चुकी थी।
शव को आजमगढ़ से लाकर परिजनों ने डॉक्टर के अस्पताल पर हंगामा शुरू कर दिया शासन-प्रशासन और डॉक्टर की मांग करने लगे लेकिन काफी समय हो जाने पर प्रशासन नहीं आई इस पर परिजनों ने शव को खरिहानी मेंहनगर मुख्य मार्ग पर रखकर रास्ता जाम कर दिया जब यह बात तो प्रशासन को पता चली तो उसके हाथ-पांव फूल गए और आनन-फानन में मेहनगर थानाध्यक्ष, तरवा थानाध्यक्ष मेहनाजपुर थानाध्यक्ष और उपजिलाधिकारी मेंहनगर मौके पर पहुंचे और परिजनों को काफी समझा-बुझाकर जाम को खुलवाया और जब इस पर उपजिलाधिकारी मेहनगर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अस्पताल में एक महिला की मृत्यु हो गई है अभी तक कोई तहरीर नहीं पड़ी है इसलिए अभी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है ।
और इस मामले को परिजन और कुछ लोगों ने मिलकर ₹100000 में सुलह समझौता करा दीया।
वहीं मेहनगर स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल की अब देखने वाली बात यह होगी कि यह नर्सिंग होम रजिस्टर्ड नर्सिंग होम है या किसी के डिग्री पर संचालित किया जा रहा है ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इसके पहले भी इस अस्पताल में इस प्रकार की दो घटनाएं घट चुकी है।
मृतका मनसा देवी अपने पीछे 3 बच्चों को छोड़ गई है जिसमें 2 बच्चे और एक बच्ची है
किसी की जान की कीमत ₹100000 है यह बड़ी ही शर्म की बात है अब देखने वाली बात यह होगी कि स्वास्थ्य विभाग आजमगढ़ की टीम क्या कार्रवाई करती है और इस प्रकार से ना जाने क्षेत्र में कितने अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं लेकिन अब तक प्रशासन की मिलीभगत से इस प्रकार के डॉक्टर सबके लिए खतरा बने हुए हैं और इनके ऊपर कोई भी कार्यवाही नहीं हो रही है।
कितने अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित किए जा रहे हैं जो किसी डॉक्टर की डिग्री लगाकर स्वयं इलाज कर रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम का ध्यान जरा भी इस तरफ नहीं है कि किसी की जिंदगी के साथ लगातार डॉक्टर खिलवाड़ कर रहे हैं और ऐसी घटनाएं आए दिन होती रहती है लेकिन अभी भी इस पर स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी तरह से मौन है

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