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झांसी

झाँसी में डॉ. एनके जैन ने कोरोना से जीती जंग, उपचार के दौरान भी निभाई जिम्मेदारियां

झांसी। डॉक्टर किसी के लिए उम्मीद तो किसी के लिए भगवान का दूसरा रूप हैं। पर कोरोनोवायरस के खिलाफ लड़ाई के दौरान डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी बेहद कठिन दौर से गुजर रहे हैं। जहाँ जनपद के कई डॉक्टर ड्यूटी के चलते कई दिनों से घर वापस नहीं जा पा रहे है, वहीं कई संक्रमण की चपेट में भी आए। कुछ दिन पहले अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन के जैन व मेडिकल ऑफिसर डॉ. सतीश चन्द्रा भी संक्रमण का शिकार हो गए थे। यह बड़ी राहत की बात है कि कोरोना से जंग जीतने के बाद अब उन दोनों ने कोरोना के खिलाफ़ लड़ने की कमान वापस संभाल ली है।

बता दें कि डॉ. एन के जैन को 10 जुलाई को कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी, वहीं डॉ. सतीश चन्द्रा को 11 जुलाई को संक्रमण की पुष्टि हुई थी। ये दोनों ही डॉक्टर साथ में कार्य कर रहे थे। डॉ॰ जैन ने बुखार आने के बाद अपनी जांच कराई, सकारात्मक आने पर उन्होने अपने परिवार और स्टाफ़ सहित डॉ॰ चन्द्रा को भी जांच के लिए बोला, जिसमें सभी स्टाफ और परिवार तो नकारात्मक निकले बस डॉ॰ चन्द्रा की जांच पॉज़िटिव आ गयी।
कोविड-19 के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए डॉ. जैन ने बताया कि कोविड के समय में हम सभी कार्य कर ही रहे है, सावधानी भी पूर्णतया बरती गयी लेकिन जैसे कि यह एक वायरस है और यह कभी भी किसी को भी हो सकता है। जब मेरी रिपोर्ट पॉज़िटिव आयी तो सबसे पहले मुझे अपने परिवार का ख़्याल आया और शायद इसी डर से कुछ दिनों तक मुझे मानसिक तनाव रहा। बड़ागाँव एल-1 यूनिट में भर्ती रहते हुये जब मैंने देखा कि मुझे कोई भी समस्या नहीं है तो यह तनाव भी सामान्य हो गया। आइसोलेशन के दौरान मैंने प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन किया। दवाइयों के साथ हाई प्रोटीन डाइट, प्रतिरोधक क्षमता बढाने वाले खाद्य पदार्थ और योग किया। इस दौरान अपना मनोबल और धैर्य बनाए रखा।
डॉ॰ जैन के साथ कार्यरत डॉ॰ चन्द्रा भी कोरोना समय में दिन रात मेहनत कर रहे थे, उनके ही जिम्मे कोरोना कंट्रोल रूम था, वह बताते हैं कि जब उन्हें कोरोना पॉज़िटिव होने का पता चला तो कुछ पल के लिए वह खुद अचंभित हो गए क्योंकि उन्हे कोई भी समस्या नही हुयी थी। कुछ समय का मानसिक तनाव रहा और उसके बाद सब सामान्य हो गया। उनके परिवार में भी किसी की जांच पॉज़िटिव नहीं आयी, तो उन्होने एल-1 यूनिट के बाद घर पर आइसोलेशन के लिए अपने परिवार को दूसरे घर में भेज दिया था।

तनाव से नहीं सावधानी से बनेगी बात
डॉ॰ जैन बताते है कि लोगों के मन में कोरोना को लेकर डर बैठा हुआ है, यदि यह हो गया तो जीवन ख़त्म जबकि इसमें संक्रमण प्रसार की दर बहुत कम है और उससे भी ज्यादा कम मृत्यु दर है। इससे डरने की नहीं बल्कि सावधानी बरतने की ज़रूरत है। हमें याद रखना चाहिए कि कोरोना से अधिक खतरा केवल बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमारियों से ग्रसित लोगों को है। उपचार के दौरान अपने खान-पान पर ध्यान दें। तनाव बिलकुल न लें, इससे प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है। शारीरिक दूरी, मास्क का उपयोग और बार-बार हाथ धोने की आदत डालना कोरोना संक्रमण से काफी हद तक बचने में मदद कर सकता है।

उपचार के दौरान भी निभाते रहे जिम्मेदारियाँ
स्वास्थ्य के क्षेत्र में इस समय प्रशासनिक पद पर काम कर रहे अधिकारियों के लिए कई अतिरिक्त चुनौतियाँ हैं। ऐसे में डॉ. जैन और डॉ॰ चन्द्रा ने उपचाराधीन रहते हुए भी अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभाई। एल- 1 यूनिट में रहने के दौरान भी वे फोन, इन्टरनेट और व्हाट्सएप के ज़रिये स्टाफ का मार्गदर्शन और सहयोग करते रहे।

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