अक्सर करना पड़ता है मौत का सामना, जानें क्या है कारण

झांसी। जीना है तो लड़ना है फिर चाहे मौत हो या हालात। यह कहना है कि उन तमाम लोगों का जो झुग्गी झोपड़ी में रहकर अपना  गुजर बसर कर रहे हैं। अपनी जीविका चलाने के लिए उन्हें हर रोज मौत का सामना करना पड़ता है। फिर बस जीए जा रहे है साहब!


झांसी शहर में ग्वालियर मार्ग पर झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले इन लोगों को देखिए। इन्हीं में एक है ममता नाम की महिला। ममता का कहना है कि उसकी स्थिति देखकर स्वयं अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पर रहने वाले लोग किस प्रकार अपनी जिंदगी गुजर बसर कर रहे होंगे। अपना और परिवार गुजर बसर करने के लिए उन्हें जंगलों में जाना पड़ता है। जहां वह लकड़ी लाते हैं। इस दौरान कई जहरीले जीव-जंतु भी मिल जाते हैं। जिन्हें देखकर ही डर लगता है। लेकिन वह कर भी क्या सकते हैं। उन्हें जीना जो है। लकड़ी लेकर वह अपने झोपड़ियों में आते हैं। जहां वह लगभग दो घंटे मशक्कत के बाद एक झाड़ू तैयार कर पाते हैं। उस झाड़ू को बाजार में मुश्किल से 10 रुपए में बेचते हैं।  पूरे दिन में वह कभी 100 रुपए की झाड़ू बेच पाते हैं तो कभी 50 रुपए पाकर ही संतुष्ट रहना  पड़ता है।