Exclusive: 130 रुपए की दहाड़ी के लिए मजदूर रोजना डालते हैं जोखिम में जान, झाँसी की ये तस्वीरें देख दहल जायेगा दिल

झांसी। गरीबी और लाचारी इंसान से क्या-क्या करवाती है। यह बुन्देलखंड में रहने वाले लोगों से बेहतर कोई नही जानता है। ऐसी ही कहानी है झांसी जिले की। जिसे सुनकर और देखकर किसी के भी रोंगेटे खड़े हो जायेंगे। यहां मजदूर 130 रुपए की दहाड़ी के लिए रोजना अपनी जान जोखिम में डालकर बेतवा नदी पार करते हैं।


झांसी मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर पारीछा बांध है। यह बांध बेतवा नदी पर बना है। इसकी लम्बाई लगभग 2 किलोमीटर है। इतना ही नहीं इस बांध की गहराई भी 20 फुट से अधिक है। जिसमें लाखों लीटर पानी जमा होता है। इस बांध की एक बात और खास है जिसे जानकर आप हैरान और परेशान हो जायेंगें। तस्वीरें काफी विचलित भी करेंगीं।
तस्वीरों में देख सकते है कि झांसी जिले के पारीछा थर्मल पावर में मजदूरी करने के लिए नजदीक के ग्रामीणों इलाकों से दर्जनों मजदूर आते हैं। यह मजदूर रोजना अपनी जान जोखिम में डालकर बांध पर बनी लगभग 5 फुट चैड़ी पट्टी के सहारे बेतवा नदी के एक किनारे से दूसरे आते-जाते है। इस 5 फुट चैड़ी पट्टी पर काई और पानी की जलधारा निंरतर बहती रहती है। जिस पर आम व्यक्ति चलना सपने में भी नहीं सोच सकता है।


इस पट्टी पर जान जोखिम में डालकर निकलने वाले मजदूरों से बात की गई तो हकीकत जानकार दिल को झकझोर देने वाली कहानी सामने आई। झांसी टाईम्स की टीम ने जब मजदूर भानू प्रताप और हरदयाल से बात की तो उनका कहना है कि उन्हें पारीछा थर्मल पावर में मजदूरी के बदले 130 रुपए मिलते हैं। इन रुपयों में वह अपना और परिवार का भरण पोषण करे या फिर गांव जाने तक लम्बी दूरी तय करने में खर्च करें। क्योंकि गांव तक पहुंचने से पहले उन्हें झांसी जाना पड़ेगा। इसके बाद झांसी से बरुआसागर और फिर बरुआसागर से अपने गांव। जहां तक पहुंचने उनके लगभग 50 रुपए प्रतिदिन बस या फिर अन्य संसाधन में खर्च करने पड़ेंगे जो काफी कम है। वह पैसा और समय बचाने के लिए इसी प्रकार रोज अपनी जान जोखिम में डालकर बेतवा नदी को पार करते हैं। यह काम उनका रोजना का है अब उन्हें डर नहीं लगता है।

ऐसे करते है बेतवा नदी पार
उक्त लोगों का कहना है कि बांध की पट्टी पर चलने से पहले वह जूते उतारते हैं, इसे बाद अपने पैरों में मौजे पहनते है। मौजे पहनकर वह असानी से काई लगी पट्टी पर फिलसने से बच जाते है। साथ ही वह पट्टी पर बहने वाली जलधारा के बीच से सुरक्षित निकल जाते हैं। इस पट्टी पर वह हीं नही बल्कि गांव की महिलायें भी निकलती है। युवकों का कहना है कि वह इस पट्टी पर अपने साथ साइकिल भी लेकर चलते हैं।