पहाड़ों व क्रेशरों पर नियमों का नहीं हो रहा पालन,हैबी ब्लास्टिंग से बस्ती के लोग रहते भयभीत

(रिपोर्ट-सैय्यद तामीर उद्दीन) महोबा। पत्थर मण्डी कबरई में खनन कार्य तेज हो गया है, पहाड़ों व क्रेशरों पर आयेदिन दुर्घटनाएं घटित हो रही है। जिम्मेदार चुप्पी साधे हुये है खनन माफिया अधिक धन कमाने की लालसा में मजदूरों से जोखिम भरे कार्य कराने में पीछे नही है। काम करने  वाले मजदूरों को न तो कोई सेफ्टीकवर और न ही कोई नियम कानून के तहत कार्य कराया जा रहा है। यही वजह है कि पहाड़ों व क्रेशरों पर प्रतिदिन दुर्घटनाएं घटित हो रही है। बताते चले पत्थर मण्डी कबरई, डहर्रा, पहरा, मकरवई, गंज, जुझार आदि क्षेत्रों में पहाड़ों व क्रेशरों की भरमार है और यहां हजारों की संख्या में मजदूर क्रेशर व पहाड़ों पर काम करते है। बताते चले स्थानीय मजदूरों से अधिक बाहरी मजदूर इन पहाड़ों व क्रेशरों पर काम करते है, पहाड़ों व क्रेशरों पर काम करने  वाले मजदूरों को माफिया काम कराते समय कोई भी उपकरण उपलब्ध नही कराते है यही वजह है कि आयेदिन पहाड़ों व क्रेशरों पर दुर्घटनाएं घटित होती रहती है, अभी शुक्रवार को ही पहाड़ों पर काम करते समय एक मजदूर काल के गाल में समा गया था तो दूसरा मजदूर पहाड़ से गिरने से घायल हो गया था। बताते चले पत्थर मण्डी कबरई व उसके आस-पास पांच सैकड़ा से अधिक पहाड़ व क्रेशर संचालित है पहाड़ों व क्रेशरों पर मजदूरों से काम कराने के लिये नियम व कानून भी बने है लेकिन खनन माफिया नियमों व कानूनों को नजर अंदाज करते हुये अधिक धन कमाने की लालसा में मजदूरों से काम कराने में लगे हुये है। जिला प्रशासन द्वारा पिछले दिनों स्पष्ट निर्देश दिये थे कि पहाड़ों पर मजदूरों से नियमानुसार काम कराया जाये लेकिन जिला प्रशासन के निर्देशों का भी यहां कोई असर नही नजर आ रहा है, इतना ही नही पहाड़ों पर होने वाली ब्लास्टिंग का कोई समय निर्धारित नही है। खनन माफिया पहाड़ों पर निर्धारित समय के अलावा ब्लास्टिंग कराते है। पहाड़ों पर ब्लास्टिंग होने से पहाड़ों के नीचे बस्ती में पत्थर गिरते है जिसका विरोध भी अनेक बार किया गया लेकिन कुछ समय के बाद फिर सब कुछ पुराने ढर्रे पर चालू हो जाता है। क्षेत्र वासियों ने जिला प्रशासन से पहाड़ों व क्रेशरों पर होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने  तथा नियमानुसार खनन कार्य कराने की मांग की है।